दुर्ग जिले में प्रस्तावित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) परियोजना को लेकर जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने परियोजना प्रभावित क्षेत्र के 18 गांवों में जमीनों की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, खाता विभाजन और अन्य भूमि संबंधी लेन-देन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद प्रभावित गांवों के किसानों, भू-स्वामियों और रियल एस्टेट कारोबारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दरअसल, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत मालगाड़ियों के लिए विशेष रेल मार्ग विकसित किया जाना है। यह परियोजना देश में माल परिवहन को तेज और सुगम बनाने के साथ-साथ उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा उपलब्ध कराएगी। परियोजना के लिए दुर्ग जिले के कई गांवों की जमीनें अधिग्रहित की जानी हैं। ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले जमीनों की खरीद-फरोख्त बढ़ सकती है, जिससे सट्टेबाजी और फर्जी लेन-देन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी को रोकने के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है।
कलेक्टर के आदेश के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण, बंटवारा या अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रिया बिना अनुमति के नहीं हो सकेगी। यदि किसी व्यक्ति को विशेष परिस्थिति में जमीन से संबंधित कोई कार्य कराना है, तो उसे कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देना होगा। प्रशासन संबंधित विभागों की रिपोर्ट और परियोजना की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा।
इस आदेश का असर सीधे तौर पर उन किसानों और भू-स्वामियों पर पड़ेगा जिनकी जमीनें परियोजना की जद में आ रही हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि इससे वास्तविक भूमि मालिकों के हित सुरक्षित रहेंगे और भूमि अधिग्रहण के दौरान उन्हें उचित मुआवजा दिलाने में आसानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान इस तरह के प्रतिबंध आमतौर पर लगाए जाते हैं ताकि भूमि रिकॉर्ड में अचानक बदलाव न हो और अधिग्रहण प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।
इन 18 गांवों में लागू रहेगा प्रतिबंध
- बिरेझर
- चंगोरी
- कोनारी
- चंदखुरी
- हनोदा
- खम्हरिया
- उमरपोटी
- उतई
- डुमरडीह
- सिरसाकला
- परसदा (पाहंदा)
- परेवाडीह
- पहंडोर
- सोमनी
- औंधी
- मगरघटा
- बेन्द्री
- पथरीडीह
फिलहाल यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फ्रेट कॉरिडोर परियोजना राष्ट्रीय महत्व की योजना है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। आने वाले दिनों में प्रभावित गांवों के किसानों और स्थानीय लोगों के साथ बैठकें भी आयोजित की जा सकती हैं, ताकि परियोजना से जुड़ी जानकारी और मुआवजा प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।