नई दिल्ली में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह मामले में जांच के दौरान एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह कथित रूप से आईजीआई एयरपोर्ट पर सिविल एविएशन विभाग में तैनात एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के निर्देश पर काम कर रहा था। इस मामले ने प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार, गुजरात के वडोदरा से जुड़े एक बड़े दवा घोटाले के दो आरोपियों को राहत दिलाने और उनका नाम केस से हटवाने के नाम पर सौदेबाजी की गई थी। आरोप है कि पिछले मई महीने में इन आरोपियों की मुलाकात संबंधित आईएएस अधिकारी के कार्यालय में कराई गई थी। शुरुआत में आरोपियों से केस में मदद करने के एवज में 3 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में बातचीत के बाद यह सौदा 1.5 करोड़ रुपये में तय हुआ।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने इस डील के तहत अग्रिम राशि के रूप में 50 लाख रुपये कुछ दिन पहले इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को सौंप दिए थे। इसके बाद सोमवार को जब इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह सौदे की अगली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की रिश्वत ले रहा था, तभी सीबीआई ने जाल बिछाकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
सीबीआई की एफआईआर में संबंधित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम भी शामिल किया गया है। जांच के दौरान फोन इंटरसेप्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से दोनों के बीच कथित सांठगांठ के संकेत मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि बातचीत के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज इस पूरे रिश्वत नेटवर्क की पुष्टि कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अब मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी जल्द ही आरोपी आईएएस अधिकारी से पूछताछ कर सकती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उनकी गिरफ्तारी भी संभव मानी जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और प्रभाव के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सीबीआई मामले की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।