भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषकों को गुणवत्तायुक्त एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के उप संचालक आशीष चन्द्राकर ने बताया कि जिले के सहकारी समितियों में गतवर्ष पूर्ति के 80 प्रतिशत यूरिया एवं 60 प्रतिशत डी.ए.पी. का भण्डारण कराया जा रहा है। जिले को प्राप्त लक्ष्य (46300 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र में) के विरूध्द अब तक सहकारी समितियों में करने हेतु 33580 मीट्रिक टन (72.50 प्रतिशत) उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। सहकारी समितियों से अबतक 20259 मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है एवं 13300 मीट्रिक टन सहकारी समितियों में शेष है। जिले के प्रत्येक कृषक को उवरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कृषक के रकबा के के आधार पर वैज्ञानिक अनुशंसा अनुसार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। यूरिया एवं डीएपी के अतिरिक्त अन्य वैकल्पिक उर्वरक के रूप में एस.एस.पी., एन.पी.के, का उपयोग कर कृषक पोषक तत्वों की पूर्ति कर रहे है। उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये उर्वरक निरीक्षको द्वारा लगातार जिले में संचालित उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। खरीफ 95 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है एवं अनियमितता पाये जाने पर 36 विक्रय केन्द्रों को कारण बताओ नोटिस, 08 विक्रय केन्द्रों को विक्रय प्रतिबंध एवं 01 विक्रय केन्द्र का लायसेन्स निलंबन की कार्यवाही की गई है। उन्होंने बताया कि कृषकों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरीक्षण लगातार चलता रहेगा एवं उर्वरक विक्रय केन्द्रों में उर्वरकों के भण्डारण एवं वितरण में किसी भी प्रकार से अनियमितता पाये जाने पर संबंधित उर्वरक विक्रेता के विरूध्द उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के प्रावधानों के तहत कठोर एवं दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।