दुर्ग/भिलाई। टॉपवर्थ रसमड़ा के 600 श्रमिकों को बकाया 15 महीनों का वेतन दिलाये जाने तथा रायपुर स्टील सहित रसमड़ा औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषण पर रोक लगाने व एसीसी मैनेजमेंट द्वारा श्रमिकों को प्रताडि़त न करने तथा चंदूलाल चंद्राकर कचांदूर अस्पताल के काम से बंद किये गये स्वास्थ्यकर्मियों को काम पर वापस लेने आदि मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के श्रमिक व समर्थकगण दुर्ग गंच चौक में एकत्रित हुए वहां से दोपहर 12 बजे छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में रैली प्रारंभ हुई जो जी.ई. मार्ग से कलेक्ट्रेड पटेल चौक होकर गांधी चौक होते हुए श्रम विभाग के सामने धरना दिये।
धरना स्थल पर हुयी सभा को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष व एक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री भीमराव बागड़े के अलावा उपाधक्ष ए.जी.कुरैशी, एक्टू के राष्ट्रीय सचिव बृजेन्द्र तिवारी, प्रगतिशील सीमेंट श्रमिक संघ के अध्यक्ष धनंजय शर्मा, सनत जंघेल, मोहम्मद अली, टॉपवर्थ कंपनी के श्री भोजराम साहू, जयश्री साल्वेक्स रसमड़ा के दिलीप पारकर, क्रेस्ट स्टील जोरातराई के डेरहा राम साहू, सोना बेवरेज के जिम्मेदार धरती राम साहू, आदि वक्ताओं ने संबोधित किये। सभा का संचालन तुलसी देवदास एवं पुनाराम साहू ने किया।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए शासन द्वारा श्रम विभाग बनाया गया, वे अधिकारी श्रमिक हितों की रक्षा करने के बजाय उद्योगपतियों के हितों की रक्षा कर रहे है। इसलिए औद्योगिक संबंध अधिनियम 1947 की धारा 25 (एम) के बावजूद मजदूरों को कंपनी बंद के दौरान का 15 महीनों का वेतन जो प्रत्येक मजदूरों का सवा लाख रुपए से अधिक है कुल साढ़े छह करोड़ रुपया गबन कर लिया गया। औद्योगिक क्षेत्र रसमड़ा के लिये ग्रामीणों की जमीने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मोतीलाल वोरा के निर्देश पर ली गयी। बताया गया कि स्थानीय मजूदरों को काम मिलेगा किन्तु रायपुर स्टील सहित अनेक कंपनियों ने स्थानीय बेरोजगारों को काम नहीं मिल रहा है। रसमड़ा सहित आस पास के 10 गांव के नागरिक प्रदूषण से परेशान है। तालाब का पानी निस्तारी के लायक नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी व ए.के.व्ही.एन. ने आंख मूंद रखी है।

उन्होंने यह भी कहा कि एसीसी सीमेंट कंपनी जामुल के मैनेजमेंट द्वारा मजदूरों को भेदभाव का प्रताडि़त किया जा रहा है। भिलाई औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर श्रमिक श्रम प्रावधानों से वंचित है। इसलिए शासन स्तर पर यूनियन प्रतिनिधियों को मिलाकर कमेटी बनाकर जांच करके श्रम प्रावधानों का पालन कराया जाये।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चंदूलाल चंद्राकर कचांदूर अस्पताल को अधिग्रहण किया गया। उसमें बरसों से कार्यरत् 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले 14 महीनों से काम पर नहीं लिया जा रहा है बल्कि ठेकेदारों के माध्यम से नया भर्ती किया जा रहा है जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। वक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि समय रहते समस्या का निराकरण किया जावे अन्यथा मजदूर किसान बड़े पैमाने पर आंदोलन के लिये बाध्य होंगे। सभा के दौरान माननीय मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया।

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