दुर्ग/ भिलाई / आए दिन आपको न्यूज़ पेपर में या चैनलों में या फिर कहीं ना कहीं आसपास की खबरों में पता चलेगा कि फलाना थाने की पुलिस ने सटोरियों को पकड़ा जुआरियों को पकड़ा यह खबर आम हो चली है सट्टे का छाया ऐसा सुरूर कि इसका कारोबार ही खड़ा हो गया है जिले में सट्टे का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में इसके कारोबार ने बढ़त बना ली है।और हैरानी वाली बात यह है जब मालूम हो कि थाने के प्रभारी पुलिस के साथ-साथ वहां काम कर रहे पुलिसकर्मियों को भी जानकारी हो कि उक्त जगह में जुआ सट्टा खेला जा रहा है, जिसकी अनुमति भी पुलिस के द्वारा दिया जा रहा है, यह तो हैरान करने वाली बात है ऐसा ही कुछ देखने को मिला है नेवई थाना, उतई थाना, पाटन थाना जिसमे खुलेआम कार्यालय बनाकर 5-7 लोग बैठकर धडल्ले सट्टा पट्टी लिखकर एक कारोबार ही चला रहे हैं |
यह सुनने में और भी अचंभा लगता है कि जब उनसे पूछा गया कि सट्टा पट्टी खेलने की अनुमति कहा से प्राप्त है तो जवाब में मिला कि हमें तो पुलिस ने थाना से अनुमति दिया है , यह तो और हैरान करने वाली बात है खुलेआम सट्टा पट्टी लिख रहे हैं |
यह सब कार्य नेवई,उतई, पाटन के थाना क्षेत्र में बकायदा कार्यालय बनाकर किया जा रहा है, खुलेआम सट्टा पट्टी लिख रहे व्यक्ति ने बताया कि थाना से उसे अनुमति प्राप्त है अगर उस व्यक्ति को थाने से अनुमति प्राप्त है तो हर किसी को भी थाने से सट्टा पट्टी लिखने हेतु अनुमति आराम से मिल जाएगी | इस तरह की जानकारी जब दो पत्रकार रवि सोनकर, अभिषेक सावल को लगा तब पत्रकारों ने भी सट्टा पट्टी लिखनेकी अनुमति मांग ली | जिस पर दुर्ग पुलिस अधीक्षक को आवेदन भी दिया गया अब देखते हैं जब दूसरे आम जनता को पुलिस सट्टा पट्टी लिखने की अनुमति दे सकते हैं तो पत्रकारों को भी सट्टा पट्टी लिखने और व्यवसाय करने की अनुमति प्रदान कर सकती है क्या ?

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