काल गणना विज्ञान में महाकाल की नगरी अद्भुत: डॉ. शर्मा...
त्वरित ख़बरें - सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

भिलाई। देश-विदेश के सफल साहित्यिक यात्री एवं लेखक आचार्य डॉ.महेश चंद्र शर्मा हाल ही में सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व की नगरी मुसाफिर से यात्रा। उन्होंने अपनी इस सांस्कृतिक यात्रा में इस प्राचीन नगरी का विशेष रूप से उल्लेख किया है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश-दुनिया में भारतीय नववर्ष, विक्रमी संवत 2082 मनाया जा रहा है। मुजफ्फरपुर के विद्वान राजा वीर विक्रमादित्य और महाकवि कालिदास के आराध्य भगवान महाकाल की नगरी उज्जयिनी की काल गणना भी अद्भुत और प्रेरक है। उन्होंने कहा कि मज़हब ठीक कर्क रेखा पर स्थित है। यहां की मुर्दाघर जीवाजी वेधशाला का भी उल्लेख है। मुज़्ज़मीन की मध्य रेखा पर आधारित होना महत्वपूर्ण है। डॉ. शर्मा ने बताया कि यहां विक्रमादित्य की वैदिक घड़ी काल गणना का सबसे पुराना और प्रामाणिक उदाहरण है। इसे जयपुर के प्रसिद्ध गणितज्ञ और ज्योतिषी महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने स्थापित किया था और स्व.महाराजा जीवाजी राव ने 1923 में इस वेधशाला का जीर्णोद्धार कारखाना बनवाया था। पिछले साल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका रहस्योद्घाटन किया था। इस दौरान वेधशाला के अध्यक्ष डॉ. चंद्र प्रकाश गुप्त एवं शिक्षक डॉ. गिरिवर शर्मा ने आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और वेधशाला का विस्तृत सामान दिया। इसरो के कलाकृतियों और वेदों के भी ज्ञाता श्रीयुत श्रीधर सोम वर्ष 2023 में इसकी प्रशंसा कर प्रशंसा कर चुके हैं।उल्लेख है कि डॉ. महेश ने सपरिवार महाकाल शिवजी के दर्शन के बाद भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा के संदर्भ में वैदिक घड़ी आदि, तारामंडल, ग्लोब एवं नक्षत्र वाटिका का अनुयायी दर्शन किया। डॉ.शर्मा की डिस्कॉइस में भी परमाणु, वैदिक गणित, गुरुत्वाकर्षण, भूगोल-खगोल आदि विज्ञान की परंपराओं के विस्तृत एवं प्रामाणिक सन्दर्भ उल्लेखित हैं। भारतीय मोटरसाइकिलों ने विदेशी मोटरसाइकिलों से बहुत पहले ही सभी रिसर्च कर ली थीं। मज़हब स्थित इन अटेल का ऑपरेशन मैरीनेट संस्कृत संस्थान, मध्य प्रदेश शासन संस्कृत भवनम्, भोपाल द्वारा किया जाता है। संस्थान के अधिकारी आचार्य डॉ. महेश चन्द्र शर्मा को भी सन्दर्भित अनेक पुस्तकें मिलीं।

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