अब 12 महीने में पूरा करना होगा विभागीय जांच, देरी होने पर होगी कड़ी कार्रवाई, सरकार ने जारी किया आदेश
त्वरित ख़बरें - दीपमाला शेट्टी रिपोर्टिंग

राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि विभागीय जांच के प्रकरणों को एक वर्ष के अंदर पूरा करना आवश्यक है। इसे लेकर प्रशासन विभाग के सचिव ने आदेश जारी कर दिया है।

राज्य के दागी शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों की विभागीय जांच एक साल के भीतर पूरा करना होगा। उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी से बचाने राज्य सरकार द्वारा इसका निर्णय लिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल द्वारा इसका आदेश जारी किया गया है।

इसमें शिकायती प्रकरणों की जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर करने कहा गया है। इसमें विलंब होने पर ठोस कारण बताना होगा। इसकी अवहेलना करने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। विभागीय जांच के दायरे में आने पर निलंबित करने और लंबी प्रक्रिया चलने पर मानसिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

वहीं तनाव के चलते कर्मचारियों के साथ ही उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ रही थी। क्लीनचिट मिलने पर शासन को निलंबन अवधि का पूरा वेतन एवं भत्ता का भुगतान करना पड़ता था। इससे शासन को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा था। जहां एक तरफ कर्मचारी को बिना काम किए ही वेतनमान एवं अन्य लाभ देना पड़ता था। वहीं दूसरी तरफ कामकाज प्रभावित होने के साथ ही अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा था। बता दें कि आर्थिक अनियमितता, काम में लापरवाही, भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और अन्य गंभीर शिकायतें होने पर विभागीय जांच होती है।

सालों तक धूल खाती रहती हैं फाइलें

विभागीय जांच की समय सीमा तय नहीं होने के कारण सालों तक निलंबित कर्मचारियों एवं अधिकारियों की फाइलें धूल खाती पड़ी रहती है। सुनवाई नहीं होने के कारण विभागों के चक्कर लगाना पड़ता है। वहीं बहाली के लिए लेन-देन करने की शिकायतें भी मिल रही थी। इसे राज्य सरकार ने गंभीरता से लेते हुए प्रकरणों का निराकरण करने का निर्देश दिया है। साथ ही उत्तरदायित्व तय कर संबंधित विभाग के जिम्मेदारी अधिकारियों को समीक्षा करने के लिए कहा गया है।

लंबित प्रकरणों की जानकारी मांगी

राज्य के सभी शासकीय विभागों से 1 साल से ज्यादा लंबित प्रकरणों की जानकारी मांगी है। इसमें उन्हें जांच में विलंब होने और वर्तमान स्थिति का ब्यौरा देने कहा गया है। बताया जांता है कि राज्य सरकार के इस निर्णय से एक तरफ जांच में तेजी आएगी। वहीं दूसरी तरफ समय सीमा तय होने से शासन और निलंबित कर्मचारियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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