जगदलपुर 30 नवम्बर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 1 से 15 दिसंबर तक विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य में एड्स जागरूकता पखवाड़ा मनाया जाएगा। सावधानी ही एचआईवी-एड्स से बचाव का प्रमुख माध्यम है। इस बात पर जोर देते हुए प्रत्येक वर्ष एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य विभाग एचआईवी एड्स को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा जिसमें लोगों को एचआईवी-एड्स के कारण, खतरे व बचाव की जानकारी दी जाएगी।
इस सम्बंध में सीएमएचओ डॉ. आर.के.चतुर्वेदी ने बताया: “एचआईवी यानि एड्स एक ऐसा वायरस है जो हमारी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। इससे तरह तरह की बीमारियां लोगों को जल्द ही घेर लेती हैं। इसी अवस्था को एड्स कहते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति के निर्देशानुसार एचआईवी-एड्स नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर भी लोगों को एड्स से बचाव हेतु जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान जनजागरूकता से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सावधानी ही एड्स से बचाव है। इस आशय का प्रचार-प्रचार करते हुए लोगों को सावधान करने हेतु स्वास्थ्य विभाग सजग है।”
महिलाओं में बढ़ रही एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता
राज्य के एनएफएचएस-5 के आंकड़ों में यह बात सामने आई है कि राज्य में पहले जहाँ 20 प्रतिशत महिलाए ही एचआईवी एड्स के बारे में जानती थी वहीं अब 23 प्रतिशत महिलाओं को एचआईवी एड्स के बारे में पर्याप्त जानकारी है। इसके अतिरिक्त पहले 57 प्रतिशत महिलाएं ही जानतीं थीं कि शारीरिक संबंध के दौरान कंडोम के प्रयोग से एचआईवी एड्स से बचा जा सकता है वहीँ अब लगभग 76 प्रतिशत महिलाओं को इस बारे में पता है।
एड्स के प्रमुख लक्षण
लगातार कई दिनों तक बिना कारण के बुखार बना रहना और किसी दवा से ठीक न होना। ये एड्स के लक्षण हो सकते हैं।
वजन कम होते जाना एवं तीन महीनों में ही रोगी का वजन 20 प्रतिशत कम होना भी एड्स के लक्षण हो सकते हैं।
लगातार एक महीने के ऊपर पतले दस्त लगना और दवाओं से ठीक न होना। ज्यादा थकान का अनुभव होना। मांसपेशियां तनावग्रस्त और अकड़ी रहना। फ्लू जैसे लक्षण- बुखार, थकान, मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों का दर्द, सूजन और सिरदर्द प्रमुख लक्षण हैं। यह सभी एड्स के लक्षण हो सकते हैं।
सिरिंज से नशा भी बन रहा बड़ा कारण
इंजेक्शन से नशा करने वाले आपस में एक दूसरे पर प्रयोग की गई सिरिंज का उपयोग कर लेते हैं। जिससे उन्हें उस समय तो होश नहीं रहता, लेकिन उनकी इस लापरवाही से एचआईवी संक्रमण एक से दूसरे में जरूर पहुंच जाता है। ओएसटी (ओरल सबटीयूएड थेरेपी) सेंटर में ऐसे हजार से ज्यादा मरीजो का उपचार चल रहा है, जो बार बार संक्रमित सुई का उपयोग करते हैं। इनमें कई लोग एचआईवी संक्रमित भी हैं।

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