टमाटर के दाम गिरे, बाकी सब्जियां महंगी:दुर्ग में टमाटर की अच्छी फसल निकली और पूरे प्रदेश में हुई सप्लाई, इसलिए कम हुई कीमत
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दुर्ग - जिले में टमाटर की अच्छी पैदावार ने त्यौहारी सीजन में टमाटर के दाम घटा दिए हैं। इससे लोगों को काफी राहत मिली है। यहां से पूरे छत्तीसगढ़ में टमाटर की सप्लाई शुरू हो जाने से थोक व चिल्हर बाजार में टमाटर की कीमत में 20-30 रुपए किलो की कमी आई है। पहले जो टमाटर चिल्हर में 50-60 रुपए किले बिक रहा था अब वह 30-35 रुपए किलो बिकने लगा है। इससे लोगों को काफी राहत मिली है। वहीं थोक मंडी में टमाटर 20-25 रुपए में बिका। बाकी सब्जियों के दाम भी थोड़ा कम हुए, लेकिन हरी सब्जी और फूल गोभी अभी लोगों को रुला रही है। पालक, चौलाई, मूली जैसी कोई भी हरी सब्जी 60 रुपए कम में नहीं बिक रही है वहीं फूल गोभी भी 60 का आंकड़ा छू रही है। दुर्ग, धमधा और बेमेतरा क्षेत्र में टमाटर की अच्छी पैदावार होती है। इस बार भी किसान ने यहां टमाटर काफी बड़े क्षेत्रफल में लगाया है और यहां से टमाटर की नई फसल आने लगी है। किसानों की माने तो बारिश की वजह से टमाटर की फसल पर थोड़ा असर तो पड़ा है, लेकिन अभी फसल अच्छी हो रही है। इसका असर बाजार में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। इससे पहले तक बाजार में कर्नाटक से टमाटर आ रहा था। कर्नाटक में टमाटर की कीमत अधिक होने के कारण यहां भी कीमत काफी अधिक थी। 15 से 20 रुपए किलो में बिकने वाला टमाटर 50-60 रुपए किलो में मिलने लगा था। टमाटर एक साल बाद इस कीमत पर पहुंचा है। वर्तमान में टमाटर की आवक ठीक हो जाने से यह थोक में 20-25 तो वहीं चिल्हर में 30-35 रुपए किलो आसानी मिल जा रहा है।

अन्य सब्जियों की कीमत में भी आई कमी
ठंड का मौसम शुरू होते ही सब्जी खाने वालों की चांदी हो जाती है। ठंड में सब्जी की अच्छी आवक अब शुरू हो चुकी है। लोकल किसानों की भी सब्जी मंडी में खूब बिकने आ रही है। इसके चलते इसकी कीमत में भी कमी आई है। मुनगा 80 से 60 रुपए, फूल गोभी 70 से 50-60, धनिया 300 से 200 रुपए किलो, बरबट्‌टी 70 से 50 रुपए किलो, बैंगन 30, लौकी 20 रुपए और आलू व प्याज 20-30 रुपए किलो में मिल जा रहा है। आने वाले 10-15 दिनों में सब्जी के दाम और तेजी से गिरने की बात कही जा रही है।

हरी सब्जी के दाम आसमान पर
धमधा के किसान उमेश देवांगन, राजेश और बंछूराम से बात करने पर उन्होंने बताया कि बरसात के चलते हरी सब्जी की फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है। उसके बाद किसानों ने फिर से जुताई करके उसे दोबारा बोया है। इससे हरी सब्जी की फसल कम आ रही है और जो आ रही है वह काफी महंगी है। पैदावार न होने से 10-20 रुपए किलो में मिलने वाली मूली 60 रुपए, 20-30 रुपए किलो की पालक 60-70 रुपए में मिल रही है। यही हाल बाकी हरी भाजी का है।

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