राजनांदगांव 12/07/2022
रथ यात्रा 1 जुलाई को पूरे भारत में मनाई गई थी. कोविड -19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद रथ यात्रा ओडिशा के “पुरी” में शुरू हुई. दिन के दौरान, भगवान जगन्नाथ के रथों के साथ बहन देवी सुभद्रा और बड़े भाई भगवान बलराम को उनके पारंपरिक मार्गों पर निकाला गया.
रथ यात्रा गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के 8 दिनों के प्रवास का प्रतीक है. यह त्यौहार मूल रूप से ओडिशा राज्य का है. यह दुनिया भर में धूमधाम और खुशी के साथ मनाया जाता है.
हर साल आयोजन के लिए भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के तीन रथ बनाए जाते हैं. जैसे ही देवता गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ते हैं, लाखों भक्त इन रथों को खींचते हैं. यह उत्सव 15 दिनों तक चलता है. भक्तों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी को छूने से उनके पाप धुल जाएंगे और उन्हें मोक्ष मिल जाएगी, जैसा कि हिंदू धर्म में माना जाता है.

Facebook Conversations