नई दिल्ली। राज्यसभा की 57 सीटों के लिए आगामी 10 जून को फैसला होना है. चुनाव को लेकर देश की राजनीति में सियासी समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं, यही नहीं सियासी दलों के भीतर भी प्रत्याशियों के चयन को लेकर उठापटक जारी है. पार्टी के कथित बड़े नेताओं को राज्यसभा के लिए जोड़-तोड़ में जुटे हुए हैं. तो कोई राजनीतिक दल राज्यसभा की सीट के जरिए इन नेताओं को सेट करने में लगे हैं. बहरहाल, स्थिति-परिस्थिति चाहे जो भी हो, इस बार राज्यसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहे
राज्यसभा की खाली हो रही 57 सीटों में से सबसे ज्यादा 11 सीटें उत्तर प्रदेश से हैं. विधानसभा में जिस तरह का राजनीतिक दलों का समीकरण है, उसके लिहाज से इन 11 सीटों में से 7 सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी, वहीं तीन सीटें सपा को मिलेगी. 11वीं सीट के लिए चुनाव होने की आशंका है. यहां सपा ने भविष्य को देखते हुए कांग्रेस छोड़ चुके वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को समर्थन दिया है, वहीं दूसरे प्रत्याशी के तौर पर राष्ट्रीय लोकदल के जयंती चौधरी का समर्थन किया है. तीसरे सीट को लेकर कश्मकश की स्थिति है. वहीं दूसरी ओर भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं.
उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु में राज्यसभा में छह-छह सीटें खाली हो रही है. इसमें डीएमके और विपक्ष के खाते में तीन-तीन सीटें आ सकती है. डीएमके यहां एक सीट अपने सहयोगी दल कांग्रेस को देने का फैसला लिया है. वहीं महाराष्ट्र की बात करें तो चार सीटें महाविकास अघाड़ी के तो वहीं दो सीटें भाजपा के खाते में जा सकती है. यहां की चार में से एक-एक सीट कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के खाते में जाएगी, चौथी सीट आपसी सहमति से तय होगी.

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है. इसमें संख्या के हिसाब से सत्तारुढ़ आरजेडी और बीजेपी के खाते में दो-दो सीटें आएंगी, तो वहीं जेडीयू के खाते में एक सीट जानी है. सीटें भले ही पांच हो, लेकिन इसमें सत्तारुढ़ जनता दल यूनाइटेड के आरसीपी सिंह के टिकट को लेकर सबसे अधिक चर्चा है. केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके शामिल होने के बाद भी जदयू उन्हें राज्यसभा में भेजने को इच्छुक नहीं नजर आ रही है, ऐसे में किसे टिकट मिलेगा, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें लगी हुई है.
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान में राज्यसभा की चार-चार सीटों के लिए चुनाव होगा. आंध्र प्रदेश की चार में से तीन सीटें वाईएसआर कांग्रेस के पास जाएगी. कर्नाटक में दो बीजेपी के खाते में तो कांग्रेस के खाते में एक सीट पक्की है, जबकि चौथी सीट के लिए संघर्ष की स्थिति बनेगी. राजस्थान में तीन सीटें कांग्रेस और एक सीट बीजेपी के पास जा सकती है.
मध्य प्रदेश और ओडिशा में तीन-तीन सीटों के लिए चुनाव होगा. मध्यप्रदेश में दो सीटें भाजपा के खाते में तो एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना तय माना जा रहा है. कांग्रेस ने विवेक तन्खा को रिपीट करने का निर्णय लिया है. वहीं भाजपा किसी अपना प्रत्याशी बना रही है, इस पर लोगों की निगाहें है. वहीं दो-दो सीटों वाले पंजाब, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, हरियाणा, झारखंड में पहले तीन राज्यों में सत्तारुढ़ दलों का दबदबा बने रहने की संभावना जताई जा रही है. हरियाणा में एक सीट बीजेपी और एक कांग्रेस, झारखंड में एक सत्तारूढ़ गठबंधन और एक बीजेपी के पास जाएगी. उत्तराखंड की इकलौती सीट बीजेपी के खाते में जा रही है.

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