पंजीयक ने कहा था बीएसपी द्वारा शुल्क तय किया जाएगा...
त्वरित ख़बरें - निशा बिस्वास छत्तीसगढ़ ब्यूरो

बैठक में पुराने दर से पंजीयन की उठी मांग....

हाउसलीज अनुबंध का पंजीयन कराने को लेकर बीएसपी के रूख ने लीजधारकों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि लीज अनुबंध का पंजीयन कराना उनकी नहीं लीजधारकों की जिम्मेदारी है। पंजीयन शुल्क और प्रक्रिया को लेकर भी बीएसपी ने अनभिज्ञता जाहिर की है।

जिला पंजीयक विभाग ने हाउस लीज अनुबंध का पंजीयन कराने को लेकर स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क तय करने की जिम्मेदारी बीएसपी पर डाले जाने के बाद प्रबंधन ने मामले से खुद को किनारा कर लिया है। भास्कर के सवालों के जो जवाब प्रबंधन की ओर से मिले हैं, उससे मामला सुलझने की बजाए और उलझ गया है। प्रबंधन ने पंजीयन कराने की सारी जिम्मेदारी लीजधारकों पर डाल दी है। इसके लिए उसने हाउस लीज अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि हाउस लीज अनुबंध होने के बाद उसका पंजीयन कराने की जिम्मेदारी लीजधारक की होती है। साथ ही स्पष्ट किया कि पंजीयन जमीन के अनुबंध के समय प्रचलित दर से की जाएगी या वर्तमान प्रचलित दर से, इसे भी बीएसपी के दायरे के बाहर का बताकर पल्ला झाड़ लिया है। सीधी बात जनसंपर्क विभाग, बीएसपी

6 चरणों में 4500 आवासों को लीज पर दिया, किसी ने पंजीयन तक नहीं कराया बीएसपी में 6 चरणों में 4500 मकान लीज पर दिए। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच लीज अनुबंध हुआ लेकिन पंजीयन नहीं कराया गया। अब जिला प्रशासन के दखल के बाद पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है, तो पंजीयन शुल्क और स्टांप ड्यूटी का भुगतान किस आधार पर करना होगा इसे लेकर विवाद हो रहा है। क्योंकि तब और अब के जमीन दर में 6 गुना से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। यानी पुराने दर से पंजीयन कराने पर 25 हजार से एक लाख और नए दर से पंजीयन कराने पर लीजधारकों को 5 से 6 लाख तक भुगतान करना होगा। इन लीजधारकों ने न ही ही पंजीयन कराया है, न ही बीएसपी प्रबंधन द्वारा इस संबंध में उन्हें जानकारी दी गई थी।

अनुबंध के समय न प्रबंधन ने चर्चा की न प्रशासन ने, लीजधारकों को नोटिस ओए अध्यक्ष नरेंद्र बंछोर का कहना है कि जिला प्रशासन के निर्देश पर बीएसपी प्रबंधन ने टाउनशिप के लीजधारकों से लीज रजिस्ट्री कराने का नोटिस जारी कर दिया है। भिलाई इस्पात संयंत्र ने 5 चरणों में लगभग 4500 मकानों को लीज पर दिया था। अनुबंध के दौरान लीजधारकों ने उस समय के बाजार भाव के हिसाब से भुगतान किया था। लीज पर रजिस्ट्री की चर्चा न तो प्रबंधन ने की थी न ही उस समय जिला प्रशासन की ओर से कोई प्रस्ताव दिया गया था। ऐसे में बीएसपी प्रबंधन भी जमीन के नए दर से अनुबंध का पंजीयन कराने दबाव नहीं डाल सकता। इसके बाद से टाउनशिप के लीजधारकों में संशय की स्थिति है। बीएसपी ने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

हाउसलीज अनुबंध का पंजीयन पुराने दर से कराए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को ओए बिल्डिंग में शाम को बैठक हुई। जिसमें बड़ी संख्या में लीजधारक शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मांग की कि हाउस लीज की रजिस्ट्री प्राथमिकता में ली जाए। साथ ही पुराने जमीन दर पर रजिस्ट्री कराने की मांग की। साथ ही इस विषय पर जिला प्रशासन, नगरीय प्रशासन व बीएसपी प्रबंधन से चर्चा के लिए ओए अध्यक्ष नरेंद्र बंछोर को अधिकृत किया गया।

जानिए इस पूरे मामले को लेकर बीएसपी ने क्या कुछ कहा सवाल: बीएसपी ने 1998 के पहले जितने मकान या दुकान लीज पर दिए, उसका अनुबंध पंजीयन कराया गया। लेकिन 1998 के बाद अनुबंध का पंजीयन क्यों हुआ? जवाब: किसी भी लीज आवास या दुकान के अनुबंध का पंजीयन कराना लीज धारक (आबंटन आदेश के अनुसार) की जवाबदारी होती है। - अनुबंध पंजीयन के प्रस्तावित प्रक्रिया में जमीन की दर अनुबंध के समय जो दर प्रचलित था, उस हिसाब से किया जाएगा या वर्तमान दर से पंजीयन होगा? 00 यह बीएसपी के दायरे में नहीं आता है। - इस पर निर्णय कब तक ले लिया जाएगा, क्या यह बता पाएंगे? 00 यह भी बीएसपी पर निर्भर नहीं करता है।

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