नयी उम्मीदें : बिलासपुर में 175 दिव्यांगों को लगाए गए अमेरिकन मैकेनाइज्ड हैंड
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बिलासपुर 26 अप्रैल

बिलासपुर में स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद से रविवार को अमेरिका में बने मैकेनाइज्ड हाथ लगाने शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कई लोग ऐसे भी आए, जिनके दोनों हाथ नहीं थे। उन्हें कृत्रिम हाथ लगवाकर नई उम्मीदें मिली है। जांजगीर-चांपा जिले के एक युवक धनेश्वर बरेट करेंट की चपेट में आ गया था, जिससे उसके दोनों हाथ और एक पैर काटना पड़ा। अब हाथ लगने के बाद उसे उम्मीद है कि वह अपनी जरूरी काम कर सकेगा। शिविर में हाथ लगवाने के बाद उन्हें उपयोग करने के संबंध में जानकारी भी दी गई। इस शिविर में प्रदेश भर से आए 175 लोगों को कृत्रिम हाथ लगाए गए।

दरअसल यह शिविर उनके लिए था, जिनका किसी एक्सीडेंट की वजह से हाथ के कोहनी से तीन इंच नीचे तक कटा हुआ है। ऐसे दिव्यांगों के लिए शहर की समाज सेवी संस्थाओं ने उन्हें मुफ्त में अमेरिका में बने मैकेनाइज्ड हाथ लगाने की व्यवस्था की थी। हाथ लगाने के बाद उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई, जिससे कृत्रिम हाथ का वे उपयोग कर सके। ऐसे दिव्यांग हथेलियों का ग्रिप बनाकर पेन या पेंसिल से लिखने से लेकर, पेंटिंग बनाने, गाड़ी ड्राइव करने और खेती तक के काम कर सकेंगे। दिव्यांगों को कलम, पानी का गिलास, खाने के लिए चम्मच, पेंट करने के लिए ब्रश, ड्राइव करने के लिए स्टेयरिंग, खेती करने के लिए फावड़ा व अन्य उपकरण पकड़ना सिखाया गया।

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                     शिविर में कृत्रिम हाथ लगाकर उसे उपयोग करने की जानकारी भी दी गई

विशेषज्ञ बोले- पूरी तरह मैकेनाइज्ड है कृत्रिम हाथ

रोटेरियन शरद सेठ गुजरात के जामनगर के रहने वाले हैं और कृत्रिम हाथ लगाने का काम सात-आठ साल से कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हादसे में जिनका हाथ कटा हुआ है, उनके लिए कृत्रिम हाथ उपयोगी है। यह कृत्रिम हाथ पूरी तरह से मैकेनाइज्ड है। इसमें उंगलियां खुल जाती हैं और ग्रिप बन जाता है। उन्होंने बताया कि देश भर में 27 हजार से ज्यादा कृत्रिम हाथ लगाए जा चुके हैं। ऐसे दिव्यांग कृत्रिम हाथ का दैनिक कार्य में उपयोग कर सकते हैं।

अब साइकिल चलाएगी आरूही

बिलासपुर के शुभम विहार में रहने वाली आरूही नागर कृत्रिम हाथ लगने के बाद बहुत खुश है। उसने बताया कि बचपन से ही उसका एक हाथ नहीं था। फिर भी वह अपने दैनिक काम के साथ ही अन्य काम करती है। कृत्रिम हाथ लगने के बाद उसे अब इस बात की खुशी है कि वह साइकिल चलाना सीख जाएगी।

2017 में हुआ हादसा, पत्नी-बच्चों के सहारे चल रही जिंदगी
जांजगीर-चांपा जिले के सिवनी में रहने वाले धनेश्वर बरेट ने बताया कि साल 2017 से पहले वह बोरिंग खुदाई का काम करता था और पूरी तरह से स्वस्थ्य था। 2017 में बोरिंग खुदाई करते समय वह करेंट की चपेट में आ गया, जिससे उसके दोनों हाथ और पैर कट गया। दो माह के उपचार के बाद वह ठीक हुआ। इसके बाद से वह घर में ही रहता है। उसकी पत्नी रोजी-मजदूरी करती है। वह अपनी पत्नी व बच्चों के सहारे अपना जीवन गुजार रहा है। कृत्रिम हाथ लगने के बाद उसे उम्मीद है कि जरूरी काम कर सकेगा।

इन संस्थाओं की मदद से हुआ आयोजन

यह शिविर रविवार को रोटरी क्लब ऑफ बिलासपुर, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद और अग्रवाल सभा बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में रोटरी क्लब ऑफ जामनगर, टेजियंस फाउंडेशन के माध्यम से किया गया। इस शिविर में प्रदेश भर के 174 लोगों को कृत्रिम हाथ लगाए गए। कोनी-मोपका बाइपास रोड स्थित गीता देवी रामचंद्र अग्रवाल विकलांग अस्पताल में आयोजित इस शिविर में अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदन मोहन अग्रवाल, संजय दुबे, राजेंद्र अग्रवाल राजू के साथ ही अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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