मैं नर्मदा हूं। सदियों से मेरे आंचल में करोड़ों लोग बसते हैं। मेरी छाती हर रोज छलनी हो रही है। गंदे नाले मेरे दामन को मैला कर रहे हैं। आज मेरा प्रकट उत्सव (जन्मोत्सव) है, घोषणाएं होंगी मेरा वैभव लौटाने की... संकल्प होंगे मुझे निर्मल सलिला रखने के। मेरा एक ही सवाल है कि मुझे मां का दर्जा दिया, पर अपनी ही मां से झूठे वादे कौन करता है? क्यों अपनी संपदा की मालकिन नहीं बनने दिया?
जिंदा नदी घोषित कर कानून बनाया तो यह हो जाएगा
- एक संस्था गठित होगी जो नर्मदा संरक्षण के लिए मेरी तरफ से क्रिमिनल केस दर्ज कराएगी।
- ऑर्गेनाइजेशन नर्मदा के नाम से लीगल एक्शन शुरू करेगा।
- मेरी जितनी भी संपदा, बायो-डायवर्सिटी और अन्य चीजें हैं, उसकी मैं मालकिन रहूंगी। विवाद स्वयं नर्मदा नदी के नाम से होंगे।
- यदि कोई सीवेज का पानी छोड़ेगा तो उसके खिलाफ क्रिमिनल केस चलेगा। मेरी संपत्ति को अवैध तरीके से कोई नुकसान पहुंचाएगा तो वह भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगा।
नर्मदा पुराण में भी कहा गया है... 'गंगा कनखले पुण्या कुरूक्षेत्रे सरस्वती, ग्रामे वा यदि वारण्ये पुण्या सर्वत्र नर्मदा।'
अर्थात्... गंगा कनखल (हरिद्वार) में, सरस्वती कुरूक्षेत्र में विशेष रूप से पुण्य स्वरूपा होती हैं, परंतु श्री नर्मदा जी ग्राम में, वन में कहीं भी प्रवाहित हों, वह सर्वत्र पुण्य स्वरूपा हैं।
...फिर भी मेरी ये दुर्दशा क्यों?
सुनिए, सरकार आपने क्या कहा था
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में कहा था कि जीवित इकाई का दर्जा इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि मां के प्रति बेटा और बेटी का भी फर्ज होता है। हम आज हैं, कल नहीं रहेंगे। हम ऐसा प्रबंध वैधानिक रूप से करना चाहते हैं कि जीवित होने पर व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने पर जो सजा मिलती है वो नर्मदा नदी के साथ करने वालों को भी मिले। उन्होंने कहा कि हम नर्मदा संरक्षण का ऐसा प्रयास करेंगे जो दुनिया में मिसाल बनेगा।
अचानक बंद कर दी गई फाइल
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मार्च 2017 में गंगा और यमुना नदियों को जीवित इकाई का दर्जा देने का फैसला सुनाया था। इसके बाद मुझे भी जीवित इकाई घोषित करने की शुरुआत हुई। तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुझे जीवित इकाई घोषित करने की घोषणा की थी। शिवराज सरकार ने नियम बनाने की जिम्मेदारी मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड को सौंपी थी। दिसंबर 2018 में सरकार बदल गई तो जिम्मेदार अफसरों ने जीवित इकाई घोषित करने की फाइल ही बंद कर दी। पूर्ववर्ती सरकार इस तैयारी में थी कि मेरी सेहत को खतरा पहुंचाने वालों के खिलाफ सजा जैसे सख्त प्रावधान किए जाएं।
देरी के कारण यह है मेरी व्यथा
मेरे उद्गम स्थल पर ही अमरकंटक शहर से निकलने वाले नाले का पानी मिलता है। महाशिवरात्रि मेले के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पिछले साल छह स्थानों नर्मदा कुंड, कोटी तीर्थ घाट, रामघाट, पुष्कर डैम, कपिल संगम और कपिलधारा में नर्मदा जल की जांच की थी। पता चला कि गत 23 से 27 फरवरी के दौरान महाशिवरात्रि के दिन नर्मदा उद्गम स्थल के आसपास टोटल कॉलीफॉर्म की मात्रा अचानक बढ़ गई थी। कॉलीफॉर्म, मानव मल के कारण पैदा होने वाला एक बैक्टीरिया है।
जहर बन रहा मेरा जल
खेतों में फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जा रही रासायनिक खाद और पेस्टीसाइड मिलाकर पानी मुझमें मिलता है, जो मुझे जहरीला बना रहा है। इसी पानी को करोड़ों लोग पी रहे हैं और विभिन्न बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। मेरे किनारे के इलाकों में लगी फैक्ट्रियों का रसायन मिला और प्रदूषित पानी मुझको भी गंदा और जहरीला कर रहा है।

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