निवेशकों की बढ़ी चिंता: सेंसेक्स में बड़ी गिरावट, IT कंपनियों के शेयर धड़ाम
त्वरित ख़बरें :अरुण रिपोर्टिंग

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सप्ताह के कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 75 हजार के स्तर के आसपास पहुंच गया। लगातार चौथे कारोबारी दिन बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बीते चार दिनों में सेंसेक्स करीब 3000 अंक तक टूट चुका है। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला, जिसके चलते निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आईटी सेक्टर में भारी दबाव की वजह से बाजार में गिरावट आई। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। इसके अलावा डॉलर के मजबूत होने और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालने से बाजार का माहौल कमजोर बना हुआ है।

कारोबार के दौरान इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली की। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों की धीमी ग्रोथ और संभावित मंदी की आशंका के कारण निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। आईटी सेक्टर में गिरावट का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ा।

बाजार में गिरावट के चलते बैंकिंग, ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों में भी दबाव देखा गया। हालांकि कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में मामूली बढ़त भी दर्ज की गई, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। दिनभर कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और अंत में सेंसेक्स भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।

शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपए डूब गए। खासतौर पर छोटे निवेशकों में चिंता का माहौल है। कई लोगों ने हाल के दिनों में बाजार में निवेश किया था, लेकिन लगातार गिरावट के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सोच-समझकर निवेश करने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुधार होता है तो भारतीय बाजार में भी स्थिरता लौट सकती है। हालांकि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

लगातार गिरते बाजार ने निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बावजूद मौजूदा गिरावट ने निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत जरूर दे दिया है।

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