NDPS केस में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल: FIR से पहले अपराध नंबर, वजन में 141.92 ग्राम अंतर; आरोपी बरी
त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

भिलाई के सेक्टर-6 में 1280 नशीली गोलियां बरामद करने के मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया अदालत में सवालों के घेरे में आ गई। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने विवेचना में सामने आई 11 खामियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी बी. पवन कल्याण को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

मामला 15 दिसंबर 2024 का है। पुलिस ने आयकर भवन, सेक्टर-6 के पास आरोपी को कथित तौर पर 1280 अल्प्राजोलम गोलियों के साथ पकड़े जाने का दावा किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन गोलियों का वजन 153.06 ग्राम दर्ज किया गया था। बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हुई गिनती और जांच के दौरान उन्हीं 1280 गोलियों का वजन 294.98 ग्राम पाया गया। दोनों वजन में 141.92 ग्राम का अंतर सामने आया, जिसका अभियोजन पक्ष अदालत में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। 

जांच में एक और महत्वपूर्ण विसंगति यह सामने आई कि एफआईआर 15 दिसंबर को शाम 5:21 बजे दर्ज हुई, लेकिन पुलिस द्वारा मौके पर तैयार किए गए तौल पंचनामा, नमूना सील पंचनामा और जब्ती पत्रक में पहले से ही अपराध क्रमांक 510/2024 दर्ज था। अदालत के सामने सवाल उठा कि एफआईआर दर्ज होने से पहले मौके पर तैयार दस्तावेजों में अपराध क्रमांक कैसे दर्ज हो गया। 

इसके अलावा पुलिस ने बरामद सभी पट्टियों से नमूने नहीं लिए और नमूना लेने की प्रक्रिया में भी कई दिन का अंतर सामने आया। मुखबिर से मिली सूचना को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने को लेकर पुलिस के बयान और दस्तावेजों में भी समानता नहीं मिली।

इन प्रक्रियागत कमियों के चलते अभियोजन पक्ष बरामदगी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। 

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