मेडिकल वार्ड के पास नशा उन्मूलन केंद्र होना जरूरी, खंडहर डिस्पेंसरी में शिफ्ट करने तैयारी
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भिलाई ३० अप्रैल

पॉवर हाउस में संचालित छावनी सिविल डिस्पेंसरी के खंडहर भवन को शास्त्री अस्पताल सुपेला के ओएसटी सेंटर के लिए रेनोवेट किया गया है। बावजूद सेंटर वहां शिफ्ट नहीं हो पाया है। इस सेंटर से नशा छुड़ाने दवा लेने वाले कुछ मरीजों को झटके या अन्य प्रकार की दिक्कत होने पर भर्ती कर इलाज देना होता है। इसलिए ऐसे सेंटरों को अस्पताल के मेडिकल वार्ड के बगल में स्थापित किया जाना है। देश में संचालित 250 ओएसटी सेंटरों को वार्ड में ही केंद्र बनाया गया है।

इसे संचालित करने वाली संस्था नाको ने ऐसा ही नियम बनाया है। किसी भी सिविल डिस्पेंसरी में मरीजों को भर्ती करने और किसी गंभीरता को मैनेज करने बेहतर इंतजाम नहीं रहते, इसलिए पॉवर हाउस की सिविल डिस्पेंसरी में रेनोवेशन के बाद भी सेंटर शिफ्ट नहीं कर सकते हैं। ओएसटी सेंटर प्रभारी डॉ. मुनीश भगत ने बाताया ओएसटी सेंटर के दवा लेने के बाद झटके आने पर मरीज को मेडिकल वार्ड में भर्ती करना जरुरी होता है।

पास में 3 अस्पताल पहले से, सभी संभावनाएं खत्म
पॉवर हाउस से 1 किमी दूर यूपीएचसी बैकुंठधाम ओर खुर्सीपार में 10 बिस्तर का अस्पताल है। 2 किमी दूर सिविल अस्पताल में 80 बिस्तर हैं। इनके बीच 4 बिस्तर अस्पताल नहीं बना सकते।

इन असामान्य नशा को छुड़ाने सेंटर का उपयोग

  • ब्राउन शुगर
  • हेरोइन
  • अफीम
  • कोकीन
  • एमडी
  • चरस

नोट- जैसा कि प्रभारी ने बताया।

सबसे पुराना सेंटर सुपेला में, बाद में पांच और बने
प्रदेश में सबसे पुराना ओएसटी सेंटर सुपेला का है। इस सेंटर के रिजल्ट के बाद केंद्र व राज्य सरकार ने पांच और सेंटर शुरू कराया। इन सेंटरों में दो सेंटर बिलासपुर में, एक-एक क्रमश: कोरबा, विश्रामपुर और मनेंद्रगढ़ में संचालित हैं। सुपेला अस्पताल का ओएसटी सेंटर 2012 में खुला है। यहां नशे के आदी रोगियों का नशा उन्मूलन करने के लिए इलाज किया जाता है। यहां तैनात डॉक्टर आवश्यक दवाइयां देते हैं।

रोज औसतन 165 शहरी नशा छुड़ाने ले रहे दवा
सुपेला के ओएसटी सेंटर से रोज औसतन 165 शहरी अलग-अलग नशा छुड़ाने की दवा ले रहे हैं। प्रभारी के मुताबिक 10 वर्षों में उनके यहां से 35 लोगों ने हेराइन, कोकीन जैसे भयंकर नशा छोड़ा है। दवा लेने वाले करीब 100 लोग आज अपना परिवार देखने लगे हैं। इसीलिए उनके सेंटर को राष्ट्रीय स्तर पर तीन बार और अभी राज्य से 2021 में बेस्ट सेंटर का अवार्ड दिया गया है।

5 लाख रुपए की बेवजह कर दी गई यहां बर्बादी
नियम के मुताबिक ओएसटी सेंटर के बगल में मेडिकल वार्ड होना चाहिए। लेकिन सुपेला अस्पताल से ओएटी सेंटर पॉवर हाउस शिफ्ट कर दिया गया। वहां मेडिकल वार्ड की सुविधा नहीं थी। इतने के बावजूद 5 लाख रुपए में उसे रिनोवेट किया। अब हालत ये है कि केंद्र सुपेला में ही संचालित होगा।

नशा उन्मूलन के प्रचार में हर साल 25 लाख खर्च
लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में संचालित ओएसटी सेंटर की जरूरत है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग से राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम संचालित होता है। इसी के प्रचार-प्रसार और रोकथाम के लिए हर साल करीब 25 लाख का बजट खत्म होता है। इस कार्यक्रम में एक डॉक्टर सहित 3 लोग प्रमुख तौर पर नौकरी कर रहे हैं। नतीजा ग्राउंड पर कभी-कभार, कागज में अक्सर दिखाई देता है। डॉक्टर कहते हैं कि नशा छोड़ने आत्मविश्वास जरुरी है।

ओएटी सेंटर वार्ड के बगल में ही रहने का नियम
ब्राउन शुगर, हेरोइन जैसा नशा छुड़ाने दुनिया में सबसे कारगर ओपिआयड सब्सटिट्यूशन थेरेपी है। इसे लेने पर संबधित को कभी झटके आने लगते हैं। उस दशा में उन्हें भर्ती कर तत्काल बेहतर इलाज देना होता है। इसीलिए इस सेंटर को अस्पतालों के अंदर भर्ती वार्ड के बगल में बनाया जाता है।           -डॉ. मुनीश भगत, प्रभारी ओएसटी

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