राजस्थान के गैंगस्टर्स से जुड़ी दर्जनों कहानियां आपने सुनी होंगी- सोशल मीडिया पर सर्च करेंगे तो हर गैंगस्टर के दर्जनों फैन पेज मिल जाएंगे। ...और मिलेगी लग्जरी लाइफ की फोटोज। किसी गैंगस्टर के सामने दर्जनभर से ज्यादा नोटों के बंडल पड़े होंगे तो कोई गैंगस्टर वीडियो (रील) में अपने गुर्गों के साथ किसी फिल्मी हीरो की तरह वॉक करता दिखेगा।
लेकिन हमें इन गैंगस्टर की रील स्टोरी नहीं, रियल स्टोरी जाननी थी। इसके लिए भास्कर के 3 रिपोर्टरों ने 10 दिन में किया 3 हजार किलोमीटर का जोखिम भरा सफर।
इसके बाद हमारे सामने आई 4 गैंगस्टर की डरा देने वाली कहानियां। इनकी रियल लाइफ सोशल मीडिया रील्स की तरह रोशन नहीं घुप अंधेरी है। ऐसी रात, जिसकी सुबह होती नहीं दिख रही। किसी के बच्चे भूख से बिलख रहे हैं तो किसी का परिवार जहर खाने को मजबूर है।

आज पहली किस्त में पढ़िए-सोशल मीडिया स्टार गैंगस्टर देवा गुर्जर की रियल स्टोरी...
सीन 1
कुर्सी पर बैठा गैंगस्टर देवा गुर्जर, पास में हैं उसके साथी और सामने टेबल पर 500 और 2 हजार रुपए के नोटों की कई गड्डियां।
सीन 2
देवा के परिवार में मातम का माहौल। बड़े भाई के चेहरे पर चिंता की सिलवटें- 21 सदस्यों का परिवार कैसे पलेगा? बच्चों की स्कूल फीस कैसे जमा होगी?
ये सीन बयां कर रहे हैं कि सोशल मीडिया और अंडरवर्ल्ड की चमक-शोहरत कितनी खोखली और बेबुनियाद है। जो देवा गुर्जर सोशल मीडिया पर नोटों की गडि्डयां दिखाकर दौलत की नुमाइश करता था आज उसके परिवार का यह हाल है कि बच्चों की स्कूल फीस के लिए रुपए कहां से आएंगे इसका कोई पता नहीं। घर के कमरों में पक्का फर्श तक नहीं है।
इंटरनेट की नकली दुनिया में भले देवा गुर्जर के 2.50 लाख फॉलोअर्स हैं, लेकिन हकीकत में 21 सदस्यों का परिवार है, जो आज अपने बेबसी पर रो रहा है।
35 साल का देवा गुर्जर 4 अप्रैल को गैंगवॉर में मारा गया था। भास्कर टीम उसके घर कोटा से करीब 20 किलोमीटर दूर बीहड़ स्थित बोराबास गांव में पहुंची। वहां जो भी देखा और सुना, वो हैरान करने वाला था।
अनपढ़ भाई पर 21 सदस्यों के परिवार की जिम्मेदारी, बोला- देवा के साथ हमारा भी मर्डर हो गया
बोराबास गांव में भास्कर टीम उसके घर जा रही थी। पतली-पतली राहें सुनसान थीं और पत्थरों का ताप हवा के साथ थपेड़े मार रहा था। सुनसान का कारण पूछा तो लोग बोले- ये गलियां पहले सूनी नहीं रहती थीं। देवा आता-जाता था, तो गहमा-गहमी बढ़ जाती थी। हम देवा के वहां पहुंचे तो परिवार के अलावा कुछ पड़ोसी भी थे, जो सांत्वना देने के लिए आए थे। बाहर कच्चे हिस्से में गाय-भैंस बंधी हुई थीं। घर के भीतर से महिलाओं के रोने की आवाजें आ रही थीं।
घरवालों से बातचीत शुरू की तो देवा का 4 साल का बेटा सचिन खेलना छोड़, हमारे पास आकर बैठ गया और बातें सुनने लगा। देवा के 54 वर्षीय भाई अमरलाल गुर्जर के चेहरे की झुर्रियां उन पर आने वाली जिम्मेदारी की कहानी कह रही थीं। अमरलाल गाय-भैसों की देखभाल, चारा-लाने ले जाने के लिए लोडिंग गाड़ी चलाते हैं। देवा पांचवी तक पढ़ा था, लेकिन उसके भाई बिलकुल भी पढ़े लिखे नहीं हैं।
अमरलाल के सिर पर अब देवा के परिवार की जिम्मेदारी भी आ गई है। अमरलाल की लड़खड़ाती आवाज बताती है कि उसे इस जिम्मेदारी और आने वाली मुश्किलों का आभास है। बोला- देवा के बाद परिवार की जिंदगी लड़खड़ा जाएगी। देवा के साथ हमारा भी मर्डर हो गया
ससुराल भेजना और गला काटना बराबर
देवा गुर्जर अपने पीछे 2 पत्नी व 10 बच्चों के लिए संघर्ष छोड़ गया। पहली पत्नी इंद्रा बाई से 4 लड़की व 2 लड़के हैं। वहीं दूसरी पत्नी कालीबाई से भी 4 लड़कियां हैं और फिलहाल वह गर्भवती है। बड़े भाई अमरलाल की 6 बेटियां और 1 बेटा है।
अमरलाल कहते हैं- देवा के 6 बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं, हर महीने 12 हजार रुपए फीस जाती थी। अब रुपए कहां से आएंगे, कैसे पढ़ाऊंगा? 21 सदस्यों का परिवार कैसे पलेगा? घर में 14 बेटियां हैं। एक बच्ची को भी ससुराल भेजना खुद का गला काटने के बराबर होगा।
देवा ने JCB, स्कॉर्पियो, बोलेरो सहित 8-10 गाड़ियां रावतभाटा की फैक्ट्रियों में लगाई हुई थीं, लेकिन फाइनेंस पर हैं या नहीं, पता नहीं। देवा फैक्ट्रियों में लेबर मुहैया करवाने के लिए ठेके भी लेता था और डीजे बुकिंग का व्यापार भी करता था। उसका व्यापार वो ही जानता था, मैं पढ़ा-लिखा भी नहीं हूं। अब किससे पैसे लेने है, किसे देने हैं, कोई हिसाब-किताब नहीं है।
ससुराल भेजना और गला काटना बराबर
देवा गुर्जर अपने पीछे 2 पत्नी व 10 बच्चों के लिए संघर्ष छोड़ गया। पहली पत्नी इंद्रा बाई से 4 लड़की व 2 लड़के हैं। वहीं दूसरी पत्नी कालीबाई से भी 4 लड़कियां हैं और फिलहाल वह गर्भवती है। बड़े भाई अमरलाल की 6 बेटियां और 1 बेटा है।
अमरलाल कहते हैं- देवा के 6 बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं, हर महीने 12 हजार रुपए फीस जाती थी। अब रुपए कहां से आएंगे, कैसे पढ़ाऊंगा? 21 सदस्यों का परिवार कैसे पलेगा? घर में 14 बेटियां हैं। एक बच्ची को भी ससुराल भेजना खुद का गला काटने के बराबर होगा।
देवा ने JCB, स्कॉर्पियो, बोलेरो सहित 8-10 गाड़ियां रावतभाटा की फैक्ट्रियों में लगाई हुई थीं, लेकिन फाइनेंस पर हैं या नहीं, पता नहीं। देवा फैक्ट्रियों में लेबर मुहैया करवाने के लिए ठेके भी लेता था और डीजे बुकिंग का व्यापार भी करता था। उसका व्यापार वो ही जानता था, मैं पढ़ा-लिखा भी नहीं हूं। अब किससे पैसे लेने है, किसे देने हैं, कोई हिसाब-किताब नहीं है।

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