कौन बेच रहा रेलवे की संपत्तियां..और कौन कर रहा इसका विरोध..?
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भारत सरकार द्वारा 6 लाख करोड रुपए अर्जित करने के लिए रेलवे के कई प्लेटफार्म सहित अनेक संपत्तियां बेचने की पहल की जा रही है। केंद्र सरकार और रेलवे के इस कदम का तमाम विपक्षी दलों और मजदूर संगठनों के द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

आरोप है कि भारत सरकार  द्वारा मुद्रीकरण अभियान के तहत् बेची जा रहीं रेलवे की 1,52,496 करोड़ रुपये की मूल्यवान परि-सम्पत्तियों में, 400 रेलवे स्टेशन, 673 किलोमीटर डेडीकेटेड फ्रेंट कॉरीडोर, 15 रेलवे स्टेडियम, 1400 किलोमीटर ओएचई ट्रैक, 90 पैसेंजर गाड़ियों, अनगिनत रेलवे कालोनी, 256 गुड्स शेड, 4 पर्वतीय रेलवे और 741 किलोमीटर कोकण रेलवे ट्रैक शामिल है। इसके बेचने के विरोध में आज भारतीय रेल के सभी 17 जोन व 8 औद्योगिक इकाईयों मेंचेतावनी दिवस एवं धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।

 यह लगभग है कि  सरकार के द्वारा रेलवे की अनेक संपत्तियों और रेलवे स्टेशनों को बेचने की शुरुआत कर दी गई है। केंद्र के इस निर्णय के पक्ष में जहां सत्ताधारी भाजपा और उसके अनुषांगिक संगठन खोखले तर्क दे रहे हैं। वही देश के मजदूर संगठनों तथा कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे श्रमिक यूनियन भी इसके विरोध में ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन की आवाज पर खुलकर सामने आ गई है। इसी क्रम में आज मंडल रेल प्रबंधक के कार्यालय के सामने संगठन द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। बिलासपुर रेलवे जोन के अंतर्गत आने वाले तीनों मंडलों यथा रायपुर, नागपुर और बिलासपुर मंडल के रेल प्रबंधक कार्यालय के सामने एक साथ धरना दिया जा रहा है। बिलासपुर रेल प्रबंधक कार्यालय के सामने धरना देने वाले इस श्रमिक यूनियन के सर्वश्री एसएम जायसवाल, जयप्रकाश, संजय सिन्हा, के अमर कुमार, एसएम बंधोपाध्याय, बीके यादव, एके पांडे, एके मोहंती,श्री नवीन कुमार,आशीष लाल, राघवेंद्र पांडे, कृष्ण कुमार, एमआर कश्यप,कृष्णकांत ओ एस ठाकुर, तारकेश्वर हर्षवर्धन प्रधान, स्वरूप फलदार, पी एस राव,अजीत कुमार, संदीप चंद्रा, विनय साहू और सीपी राठौर सहित अनेक पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में रेल कर्मचारी शामिल रहे।

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