ज्ञानवापी पर 4 जुलाई को अगली सुनवाई:मुस्लिम-हिंदू पक्ष करेंगे कोर्ट का आदेश
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वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में ज्ञानवापी मामले से संबंधित मां शृंगार गौरी के मुकदमे की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी। अगली तारीख पर मुस्लिम पक्ष की दलीलें जारी रहेंगी और फिर हिंदू पक्ष की जिरह शुरू होगी। इससे पहले आज कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष के दावे पर आपत्तियां दर्ज कराईं।

मां शृंगार गौरी से संबंधित मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है, इस दावे के साथ मुस्लिम पक्ष ने दो घंटे तक अपनी दलीलें कोर्ट में पेश की। मुस्लिम पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर कथित तौर पर पाए गए शिवलिंग और उनकी पूजा करने के दावे पर भी आपत्ति जताई।

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मुकदमा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का उल्लंघन

मुस्लिम पक्ष ने 1937 के दीन मोहम्मद बनाम राज्य सचिव के मुकदमे का फैसला अदालत में पढ़ा। कहा कि अदालत ने मौखिक गवाही और दस्तावेजों के आधार पर फैसला किया था कि यह पूरा परिसर (ज्ञानवापी मस्जिद परिसर) मुस्लिम वक्फ का है और मुसलमानों को इसमें नमाज अदा करने का अधिकार है। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि मां शृंगार गौरी का मुकदमा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट-1991 का सरासर उल्लंघन है।

सर्वे का फोटो-वीडियो न दिया जाए

उधर, सुनवाई शुरू होने से पहले एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री को कोर्ट रूम में घुसने से रोक दिया गया। हालांकि, कुछ देर बाद ही उनको प्रवेश दे दिया गया। मुस्लिम पक्ष के वकील मोहम्मद तौहीद ने जिला न्यायाधीश की अदालत से अनुरोध किया है कि ज्ञानवापी सर्वे का वीडियो और फोटो मीडिया को न दिया जाए। दो घंटे की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने वादी पक्ष के वाद पत्र के पेज 13 से 39 तक की एक-एक लाइन पढ़ी। बता दें कि इससे पहले 26 मई को मुस्लिम पक्ष ने अदालत में वाद पत्र के पेज 1 से 12 तक की एक-एक लाइन पढ़ कर अपनी आपत्ति पेश की थी।

एडवोकेट हरिशंकर जैन और उनके बेटे एडवोकेट विष्णु शंकर जैन कोर्ट रूम में प्रवेश करने से पहले कचहरी में साथी अधिवक्ताओं के पास बैठे दिखे।

एडवोकेट हरिशंकर जैन और उनके बेटे एडवोकेट विष्णु शंकर जैन कोर्ट रूम में प्रवेश करने से पहले कचहरी में साथी अधिवक्ताओं के पास बैठे दिखे।

पूजा-पाठ के अधिकार पर 8 जुलाई को सुनवाई

वाराणसी में मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले से संबंधित भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मुकदमे की आज सुनवाई हुई। ज्ञानवापी के अंदर पूजा करने के लिए की गई किरण सिंह की अंतरिम प्रार्थना पर कोई आदेश पारित नहीं हुआ। सुनवाई के अगले दिन मुस्लिम पक्ष की सुनवाई होगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी में अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई 2022 की तारीख तय की गई है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दौरान तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। अदालत कक्ष के बाहर काफी गहमागहमी का माहौल देखा गया

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दौरान तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। अदालत कक्ष के बाहर काफी गहमागहमी का माहौल देखा गया

वादी पक्ष के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपनी दलीलें पेश कीं। वहीं, मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने अपना वकालतनामा दायर किया। अदालत ने हिंदू पक्ष को प्रतिवादियों को मुकदमे की प्रति उपलब्ध कराने को कहा है। हिंदू पक्ष ने अदालत से सनातन धर्मियों को ज्ञानवापी मस्जिद में प्रवेश करने और वहां मौजूद आदि विश्वेश्वर की पूजा करने की अनुमति देने की मांग करते हुए अंतरिम राहत की मांग की है।

यह फोटो विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन और उनकी पत्नी किरण सिंह की है। किरण सिंह ने ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर एक नया केस दाखिल किया है।

यह फोटो विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन और उनकी पत्नी किरण सिंह की है। किरण सिंह ने ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर एक नया केस दाखिल किया है।

आज 5 और लोगों ने दी एप्लिकेशन

1. प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है। उनकी मांग है कि मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले से संबंधित मुकदमे में उन्हें भी पक्षकार बनाया जाए।

2. निर्मोही अखाड़े ने भी एप्लिकेशन दी है। ज्ञानवापी में दर्शन-पूजन और हिंदुओं के अधिकार को लेकर यह एप्लिकेशन दी गई है। इसमें निर्मोही अखाड़े को पक्षकार बनाए जाने की मांग की गई है।

3. केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दायर किया गया है, जिसमें ज्ञानवापी शिवलिंग के अंदर पाए गए कथित शिवलिंग की पूजा करने का अधिकार मांगा गया है। इसके अलावा विश्व हिंदू सेना के प्रमुख अरुण पाठक और विश्व हिंदू महासमिति की ओर से भी मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण में वादी या पक्षकार बनाने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया है।

 

यह फोटो ज्ञानवापी मस्जिद की है। कोर्ट के आदेश के बाद इस परिसर का सर्वे किया गया था। सर्वे रिपोर्ट का कुछ हिस्सा मीडिया में लीक हो चुका है।

8 हफ्ते में सुनवाई पूरी करने का है आदेश

वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे की कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में 13 मई को याचिका दाखिल की थी। कोर्ट में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजंस) एक्ट, 1991 का हवाला देकर कहा था कि यह मुकदमा सुनवाई के योग्य नहीं है।

याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 मई को सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि वाराणसी के जिला जज 8 हफ्ते में इस प्रकरण की सुनवाई पूरी करें। मसाजिद कमेटी द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता के ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र को जिला जज निस्तारित करें कि क्या मुकदमा सुने जाने योग्य है या नहीं है?

तब तक ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने का दावा करने वाली जगह को सुरक्षित रखा जाए। मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से न रोका जाए।  

विश्व वैदिक सनातन संघ की ओर से ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर सात मुकदमे अदालत में दाखिल किए गए हैं। उनमें से दो केस की आज सुनवाई है।

विश्व वैदिक सनातन संघ की ओर से ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर सात मुकदमे अदालत में दाखिल किए गए हैं। उनमें से दो केस की आज सुनवाई है।

 

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