GST 2.0: राहत के साथ नई चुनौती — राजस्व बढ़ा, छत्तीसगढ़ को ₹1500 करोड़ तक नुकसान की आशंका
त्वरित खबरें - रुची सिंह रिपोर्टिंग

रायपुर - जीएसटी 2.0 के लागू होने के बाद जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को कर व्यवस्था में कुछ राहत महसूस हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसके प्रभाव को लेकर उत्पादन आधारित राज्यों में चिंता भी बढ़ गई है। नई व्यवस्था के तहत टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने और अनुपालन को आसान करने की दिशा में कई बदलाव किए गए हैं, जिससे कर संग्रह में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी कलेक्शन लगातार मजबूत हो रहा है, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देता है। हालांकि, इस सुधार का दूसरा पहलू यह है कि जिन राज्यों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर आधारित है, उन्हें राजस्व के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहां खनिज संसाधन और उद्योग प्रमुख आय के स्रोत हैं, इस बदलाव से विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी 2.0 में उपभोग आधारित कर प्रणाली को और अधिक मजबूत किया गया है, जिससे उपभोग करने वाले राज्यों को अधिक लाभ मिलता है, जबकि उत्पादन करने वाले राज्यों की हिस्सेदारी घट सकती है। इसी कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ को करीब 1500 करोड़ रुपए तक की राजस्व हानि हो सकती है। यह स्थिति राज्य सरकार के लिए वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकती है, खासकर तब जब विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी परियोजनाओं के लिए लगातार संसाधनों की आवश्यकता बनी रहती है।

वर्तमान परिदृश्य में राज्य सरकार केंद्र से मुआवजे या विशेष सहायता की उम्मीद कर सकती है, ताकि इस संभावित नुकसान की भरपाई की जा सके। साथ ही, नीति विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि राज्यों को अपनी राजस्व संरचना में विविधता लाने और वैकल्पिक स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने होंगे। कुल मिलाकर, जीएसटी 2.0 ने जहां कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया है, वहीं इसके दीर्घकालिक प्रभावों को संतुलित करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है।

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