गाय को राष्ट्रपशु बनाने की मांग तेज, अब भाजपा क्या करेगी?
tvarit khabren : Arun Reporting

 मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं द्वारा हाल के समय में गाय को राष्ट्रपशु घोषित करने की मांग उठाई गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे सामाजिक सौहार्द बढ़ेगा और यह संदेश जाएगा कि गाय केवल एक धर्म का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी हिस्सा है। वहीं आलोचकों का मानना है कि इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल ज्यादा होता रहा है और असली जरूरत गौशालाओं, पशु चिकित्सा, आवारा मवेशियों की समस्या और किसानों की परेशानियों के समाधान की है।

भाजपा और अन्य राजनीतिक दल लंबे समय से गाय संरक्षण की बात करते रहे हैं। कई राज्यों में गोहत्या कानून सख्त किए गए हैं, लेकिन विपक्ष अक्सर आरोप लगाता है कि जमीनी स्तर पर गायों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। दूसरी ओर भाजपा समर्थकों का कहना है कि सरकार ने गौशालाओं, पशु संरक्षण योजनाओं और कानूनों के जरिए काम किया है।

अब यह बहस केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भी बन गई है। सवाल यही है कि क्या गाय को लेकर भविष्य में ठोस नीतियां बनेंगी, या यह मुद्दा चुनावी और प्रतीकात्मक राजनीति तक सीमित रहेगा।

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