दुर्ग में आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम; तीन दिन में रंग पहचानने लगे बच्चे
त्वरित खबरें- दामिनी साहू रिपोर्टिंग

दुर्ग जिले में दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन में एक नई रोशनी जगाने वाला एक विशेष प्रयास हाल ही में संपन्न हुआ। भिलाई के नयन दीप विद्या मंदिर में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इंट्यूशन (प्रज्ञा योग) कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस कार्यक्रम ने बच्चों की सहज बुद्धिमत्ता को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप कई बच्चे रंग, वस्तुएं और विशिष्ट कंपन (वाइब्रेशन) पहचानने लगे।स्कूल प्रबंधन और प्रशिक्षकों ने इसे दृष्टिबाधित बच्चों के आत्मविश्वास और छठी इंद्री को जगाने वाली एक अद्वितीय उपलब्धि बताया।

आर्ट ऑफ लिविंग का इंट्यूशन प्रोसेस दो से तीन दिन का वैज्ञानिक और योगिक तकनीकों पर आधारित एक विशेष सत्र है। इसमें बच्चों को ध्यान, योग, विशेष श्वास तकनीकें और गाइडेड मेडिटेशन सिखाया जाता है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों की आंतरिक सहज शक्ति, यानी छठी इंद्री (सिक्स्थ सेंस) को मजबूत करना है। इसका लक्ष्य है कि बच्चे आंखों पर निर्भर हुए बिना आसपास की ऊर्जा, रंग, वस्तु, दिशा और विचारों को महसूस कर सकें।

कार्यक्रम में 'ब्लाइंडफोल्ड एक्टिविटी' के माध्यम से बच्चों की सहज बुद्धिमत्ता को पहचानने का अभ्यास भी कराया जाता है।

प्रज्ञा योग में शामिल दृष्टिबाधित छात्रों, प्रिंस कुमार, आयुष और अक्षय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम ने उनकी सोच और समझ को एक नई दिशा दी है।

बच्चों ने बताया, "दृष्टिबाधित होने के कारण हमें पहले किसी भी वस्तु का रंग नहीं पता होता था। हम रंगों को पहचान ही नहीं पाते थे, लेकिन इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के बाद हम काफी हद तक रंग पहचानने लगे हैं।

यहां तक कि हमें किसी के फोन आने पर नंबर का पूर्वाभास भी होने लगा है। जिन बातों का हमें पहले कोई अंदाजा नहीं लगता था, अब वे सहज रूप से महसूस होती हैं, मानो कोई अंदर से संकेत दे रहा हो।"

बच्चों ने इस अनुभव को अपनी जिंदगी का पहला ऐसा पल बताया, जब उन्होंने महसूस किया कि वे भी मुख्यधारा के समान क्षमताएं विकसित कर सकते हैं।

प्राचार्या ने कहा कि "तीन दिन में 75% बच्चे रंग पहचानने लगे, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।"

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