छावनी- इलाके के सूर्या नगर की 163 झोपड़ियों में आग लगने के कारणों का खुलासा फारेंसिक जांच से हो गया है। आग बस्ती के ही राजू सोनकर के घर में रखे दीये की लौ से लगी। फारेंसिक की अब तक की जांच से स्पष्ट हो गया है कि आग शार्ट सर्किट या कैमिकल से नहीं लगी है। जिस समय राजू सोनकर की झोपड़ी में आग लगी, वह घर पर नहीं था। वह व्यवसाय के काम से रुआबांधा गया हुआ थ
एक्सपर्ट के मुताबिक आग की तपन से ही झोपड़ी में रखा सिलेंडर ब्लास्ट हुआ। कपड़े, लकड़ी और प्लास्टिक से बनी झोपड़ी में आग तेजी से फैल गई। एक-एक कर दूसरी झोपड़ियों के सिलेंडर भी ब्लास्ट होते गए, जिससे आग 11 फीट की सड़क के दूसरी तरफ बनी झोपड़ियों तक पहुंच गई। रायपुर और दुर्ग के फारेंसिक एक्सपर्ट डीएस चंद्रा और मोहन पटेल की टीम सोमवार को रिपोर्ट बनाकर पुलिस और प्रशासन को सौंपेगी। टीम के मुताबिक 1 जांच बाकी है, फिर फाइनल रिपोर्ट दी जाएगी।
झोपड़ियों में सीधे बिजली खंभे से नहीं हुआ कनेक्शन
फारेंसिक एक्सपर्ट की जांच से स्पष्ट हो गया है कि झुग्गियों में आग शार्ट सर्किट से नहीं लगी। जिस झोपड़ी में आग लगी थी वहां पर सीधे बिजली खंभे से कनेक्शन नहीं था। उस झोपड़ी से बिजली के जले हुए तार मिले हैं। इस तरह आग शार्ट सर्किट से नहीं लगी है।
टीन शेड को छोड़ बाकी सारे समान ज्वलनशील थे
जांच में पता चला है कि बस्ती की ज्यादातर झोपड़ियों की छत में टीन शेड लगा हुआ था। बाकी हिस्सा कपड़े, प्लास्टिक और लकड़ी का था। बिस्तर व पानी भरने के लिए ज्यादातर केन भी प्लास्टिक के थे। ये सभी वस्तु ज्वलनशील है। इस वजह से आग तेजी से फैली।
निगम ने 2 हजार टीन शेड समेत जरूरी सामान दिए
इधर, नगर निगम ने घटना के 6 दिन में ही पीड़ितों के लिए दोबारा सूर्या नगर में झोपड़ी बनवा रही है। इसके लिए 2 हजार टीन शेड, बांस बल्लियों समेत अन्य जरूरत का समान पीड़ितों को उपलब्ध करवाया गया है। कैंप लगाकर गैस चूल्हा भी दिया जा रहा है।

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