छत्तीसगढ़ में आरक्षक की लग्जरी कार से शराब तस्करी 10 पेटी शराब जब्त, फरार पुलिस कर्मी और दो गिरफ्तार.....
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सकरी थाने में पदस्थ एक आरक्षक द्वारा अपनी लग्जरी कार से देसी शराब की तस्करी करने का मामला सामने आया है मोपका पुलिस ने इस मामले में कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 10 पेटी देशी शराब जब्त किया है।
गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण:
मौका पुलिस के अनुसार, सोमवार देर रात देसी शराब की तस्करी की सूचना मिली थी। मुखबिर की सूचना मोपका चौक पर पुलिस ने घेरा बंदी की चिल्हाटी मोड की ओर से आ रही है रेनॉल्ट कार को रोका गया, जिसमें बलराम यादव और नवीन बोले उर्फ भज्जी सवार थे। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने गोलमोल जवाब दिए। जिससे पुलिस को शक हुआ। कार की तलाशी लेने पर उसमें पांच बोरियों में 480 पाव शराब का जखीरा मिला। जिसे पुलिस ने जप्त कर लिया।
आरक्षक की संलिप्तता:
पकड़े गए आरोपी नवीन ने पूछताछ में बताया कि वह सकरी थाना में पदस्थ आरक्षक नीलकमल राजपूत के कहने पर शराब लेकर आया आ रहा था आरक्षक न्यूज़ से 45000 रुपए देकर शराब खरीदने के लिए कहा था पुलिस ने आरक्षक नीलकमल राजपूत के बैंक खाता, चेकबुक, आईडी कार्ड, डेबिट कार्ड, और पुलिस की वर्दी कार से बरामद की।
आरक्षक का फरार होना और पुलिस की कार्यवाही:
शराब पकड़े जाने की भनक लगते ही आरक्षक नीलकमल राजपूत सरकारी थाना में पेट्रोलिंग वाहन छोड़कर फरार हो गया।सरकंडा पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और मुंगेली स्थित उसके घर पर रोड रेट कार्रवाई की गई है। लेकिन वह नहीं मिला पुलिस ने आबकारी
एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
नवीन का बयान: आरोपी नवीन ने बताया कि वह भज्जी चकना दुकान में काम करता है और वहीं से धीरे-धीरे शराब खरीद कर इकट्ठा करता था। आरक्षक नीलकमल ने उसे शराब लाने के लिए पैसे दिए थे और इस शराब को इकट्ठा करके वह आरक्षक को देने के लिए जा रहा था।
जब्त सामाग्री: कार से शराब के अलावा पुलिस की वर्दी एक प्लास्टिक का केन, एक प्लेट जिसमें पुलिस आरक्षक का बैग खाता, चेक बुक आईडी कार्ड, डेबिट कार्ड और एक
आवेदन पत्र भी मिला है जिसमें आरक्षक ने तखतपुर थाने से सक्रिय स्थानांतरित करने की बात लिखी है पुलिस ने आवेदन पत्र को भी जप्त कर लिया हैं।
यह घटना पुलिस विभाग के कुछ सदस्यों की नैतिकता पर सवाल करें करती है और इस प्रकार की घटनाओं से समाज में पुलिस की छवि धूमिल होती है। पुलिस की सख्त कार्यवाही से उम्मीद है कि ऐसे मामले में कमी आएगी और दोषियों को उचित सजा मिलेगी।

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