छग पीएससी परीक्षा का परिणाम संदेहास्पद, जांच की जाए - ठाकुर रितेश सिंह
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रायपुर/ दो साल बाद पीएससी राज्य सेवा परीक्षा की चयन सूची घोषित हुई, तो चयनित अभ्यार्थियों के यहाँ बधाईयों तांता का लगा है। परन्तु सूची में नामों को अवलोकन करने के बाद कुछ संदेह भी जन्म लेने लगे हैं, सूची के टॉप 15 में अधिकतर चयनित अभ्यार्थियों का संबंध कही न कही प्रदेश के शीर्षस्थ अधिकारियों या सत्ता के करीबियों से निकल रहे हैं। सियाशी गलियों में हल चल तेज होने लगी है। 

   उक्त मामले पर भाजपा युवा मोर्चा के ज़िला महामंत्री ठाकुर रितेश सिंह ने कहा कि आज राज्य में कुछ भी ठीक नही चल रहा है जहां देखो वहां भ्रष्टाचार पसरा हुआ है, ठेकेदारी, सप्लाई, निर्माण कार्य, ट्रांसफर जैसे कार्यों में तो राज्य भ्रष्टाचार देख ही चुका था पर पीएससी जैसे परीक्षाओं में अगर भ्रष्टाचार होने लगे तो शिक्षा और परीक्षा से आम जनमानस का विश्वास उठ जाएगा। चयन सूची को देखने पर अनेकों संदेह मन मे उठने लगे हैं, आखिर टॉप 15 में कैसे अधिकारियों व नेताओं के करीबियों का चयन हो जाता है, कहीं कहीं तो एक ही परिवार के दो लोगों का सूची में नाम आता है, यह सब महज एक संयोग है या कुछ और। अगर यह सब हो रहा होगा तब ऐसी परिस्थिति में उन अभ्यार्थियों का क्या होगा जो विकट परिस्थितियों में घर बार छोड़ कर तैयारी करते हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं जिनको नौकरी की जरूरत है ऐसे अभ्यार्थी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जाते हैं। राज्य में अगर ऐसा ही चलता रहा तो स्थिति बदतर हो जाएगी। आगे ठाकुर रितेश सिंह ने कहा कि ऐसी नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच एजेंसियों से जांच होनी चाहिए। हम पीएससी परीक्षा में मेरिट लिस्ट में आये अभ्यर्थियों की प्रतिभा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि इस लिस्ट में चयनित नामो पर नेताओं, अफसरों व कारोबारियों के बच्चों के चयन वाले इत्तेफाक पर सवाल उठा रहे हैं। क्योकिं कल को यही चयनित उम्मीदवार डिप्टी कलेक्टर और अन्य अधिकारी बनेंगे और इन्हें देश सेवा करनी है और अगर चयन में भ्रष्टाचार हुआ है तो इनसे देश सेवा की उम्मीद करना बेमानी होगी। जारी हुई मेरिट सूची से मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चे नगण्य बराबर हो गए हैं। इस जारी सूची में इतने इत्तेफाक हैं कि इन इत्तेफाकों को देख कर दिमाग चकरा गया है। इन ढेर सारे इत्तेफाकों को देखने के बाद मन-मस्तिष्क इसे पाक-साफ व ईमानदारी से किया गया चयन मानने को तैयार नहीं है अतः इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

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