जिले में टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल के लिए नामित बस्तर जिले में क्षय रोग की वास्तविक स्थिति जानने पहुंची केंद्रीय टीम का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इस सर्वेक्षण में 10 टीमों का गठन किया गया था। तय समय पर सर्वेक्षण पूरा करने के लिए सीएमएचओ डॉ. आर. के. चतुर्वेदी भी देर रात तक ग्रामीणों से मिलकर जानकारी लेते रहे। चतुर्वेदी ने बताया कि टीबी रोग में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2015 की अपेक्षा 2020 में 20 प्रतिशत तक कमी कमी लाने के चलते बस्तर जिले को सब-नेशनल सर्टिफिकेशन ऑफ टीबी एलिमिनेशन अवार्ड 2020 कांस्य पदक के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत शासन, द्वारा नामांकित किया गया है।
इसके लिए सेंट्रल टीबी डिवीजन की टीम बस्तर जिले मे टीबी मरीजों की वास्तविक स्थिति की पहचान करने आई हुई थी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के प्रमुख सदस्यों द्वारा 10 गांव के आसपास के क्षेत्र में युवोदय स्वयंसेवियों के सहयोग से डबल्यूएचओ के एप में सर्वे किया गया। जिले में 19 फरवरी से 13 मार्च 2022 तक चले कुल 9,456 घरों के सर्वे में 37,954 लोगो की स्क्रीनिंग हुई जिसमें 235 संदिग्ध की जांच की गई। 12 क्षय रोग के मरीज पाये गए।
तीन प्रकार से की गई वैरिफ़िकेशन की प्रक्रिया
{ आईसीएमआर की निगरानी में 19 फरवरी से 13 मार्च तक डब्ल्यूएचओ की एप्लीकेशन में सर्वे किया गया। {बस्तर जिले के 2015 से 2021 तक टीबी से सम्बन्धित सभी प्रकार के आंकड़ों का मूल्यांकन किया गया। { जिले में ऐसे टीबी मरीज जो अन्य प्राइवेट संस्थानों में अपनी जांच करा रहे व दवाई दुकानों से दवा ले रहे, उनके बारे में जानकारी लेने हेतु ग्रुप डिस्कशन प्रक्रिया अपनाई गई। जिसमें शामिल सदस्य के रूप में जिले के केमिस्ट, प्राइवेट प्रैक्टिशनर , ड्रग इंस्पेक्टर व अन्य प्राइवेट डॉक्टर थे।

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