बारिश और बदली के कारण कीटों का बढ़ा प्रभाव....धान में बढ़ रहे कीट प्रकोप से बचाने के लिए जानिए...जैविक कीटनाशक ब्रहमास्त्र दवा बनाने की विधि...
त्वरित ख़बरें - भारती यादव रिपोर्टिंग

सुरगी- धान की खड़ी फ़सलो में इन दिनों कीटो का प्रकोप बढ़ता जा रहा है । फ़सलो को कीट प्रकोप से बचाने के लिए किसान अपने खेतों में दवा का छिड़काव कर रहे है।धान में पोधें का रस चूसने वाले कीटों का अभी ज़्यादा प्रभाव है। किसानों की माने तो अभी धान की फसल के लिए खिली धूप की ज़रूरत होती है, लेकिन बदली और बारिश के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ाता है।किसान फ़सलो को कीटों से बचाने में जुट गये है।

कृषि छात्रों द्वारा ग्राम मोखला में किसानों को जैविक कीटनाशक बनाने प्रेरित किया जा रहा है।पं. शिव कुमार शास्त्री कृषि महाविद्यालय सुरग़ी चतुर्थ वर्ष ग्रुप क्र. 6 के छात्र स्वरूप, थारिणी, टिलेश मानकर,वैशाली साहू, यश कुमार, जयकिशन,स्वेता देवांगन,आशीष एवं चेतन राज ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव एवं रेडी प्रोग्राम के तहत जैविक, वनस्पति कीटनाशक का प्रदर्शन कर किसानों को इसके फ़ायदे बता रहे हैं। इसे घर पर आसानी से कम खर्च में तैयार कर सकते हैं। किसान रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग करते है। रासायनिक दवा पोधों और मानव एवं पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

 नीमास्त्र बनाने की विधि

कृषि महाविद्यालय कृषि कीट विज्ञान के प्राध्यापक डॉ.आर.एन. गांगुली तथा डॉ. मनोज कुमार चंद्राकर ने बताया कि जैविक कीटनाशक बनाने की विधि सिखायी जा रही है। नीम की पत्ती 10 किलो , गौमूत्र 10 लीटर  और गोबर 2 किलो लगता है। ड्रम में 200 लीटर पानी लेकर उसमे नीम की कूटी हुई पत्तियों, गोबर एवं गौमूत्र को घोला जाता है। इस घोल को छायादार स्थान पर 48 घंटे ढककर रखना होता है। इस घोल को पतले कपड़े से छानकर खेतों में प्रयोग किया जाता है।

ब्रम्हास्त्र बनाने की विधि

ब्रहमास्त्र दवा बनाने 10 लीटर गोमूत्र, 3 किलोग्राम नीम की पत्ती, 2 किलोग्राम करंज की पती, 2 किलो सीताफल की पती, 2 किलो अरंडी की पत्ती 2 किलो धतुरा के पत्ते 2 किलो अमरूद की पत्ती की जरूरत होती है। सभी पत्तियों को कूटने के बाद इसमें गौमूत्र मिलाकर कपड़े से छानकर 48 घंटे रखा जाता है। 200 लीटर पानी में 7-10 लीटर ब्रहमास्त्र मिलाकर एक एकड़ भूमि में लगी फसल में इसका प्रयोग किया जा सकता है।

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