91 साल बाद मिली गांधीजी की हस्तलिखित चिट्ठी, इतिहास प्रेमियों में उत्साह
त्वरित ख़बरें :अरुण रिपोर्टिंग

दुर्ग, में महात्मा गांधी से जुड़ी एक दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर सामने आई है। सन् 1935 में महात्मा गांधी द्वारा दुर्ग के स्वतंत्रता सेनानी उदय प्रसाद ताम्रकार को लिखी गई हस्तलिखित चिट्ठी मिली है। इस ऐतिहासिक पत्र के सामने आने के बाद इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी उदय प्रसाद ताम्रकार के पुत्र अशोक ताम्रकार ने इस चिट्ठी को दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह को अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया।

अशोक ताम्रकार ने बताया कि उनके पिता उदय प्रसाद ताम्रकार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के विचारों से बेहद प्रभावित थे और आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। वे गांधीजी के साथ लगातार पत्राचार किया करते थे। देश की आजादी के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अशोक ताम्रकार के मुताबिक यह चिट्ठी वर्षों से परिवार के पास सुरक्षित रखी गई थी।

उन्होंने बताया कि इस पत्र पर अंग्रेजों के समय का डाक टिकट और मुहर भी लगी हुई है। चिट्ठी में “वर्धा 5 पीएम, उदय प्रसाद मालगुजार ननकट्टी बोड़ेगांव” लिखा हुआ है। इसके साथ ही महात्मा गांधी ने अपने हस्तलिखित संदेश में लिखा है – “भाई उदय प्रसाद, मुझे तुम्हारे पत्र याद आते हैं।” गांधीजी के इन शब्दों को पढ़कर उस दौर के आत्मीय संबंधों और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की झलक साफ दिखाई देती है।

इतिहासकारों के अनुसार इस तरह के पत्र केवल दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे स्वतंत्रता संग्राम के जीवंत साक्ष्य होते हैं। गांधीजी के पत्रों से उस समय के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को समझने में मदद मिलती है। यह चिट्ठी भी दुर्ग जिले के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इतिहास को उजागर करने वाली महत्वपूर्ण धरोहर मानी जा रही है।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे “ज्ञानभरतम मिशन” के तहत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान कर उन्हें डिजिटलाइज और संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में इस चिट्ठी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे दस्तावेज आने वाली पीढ़ियों को देश के स्वतंत्रता आंदोलन और महान नेताओं के विचारों से जोड़ने का काम करेंगे।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव भी मौजूद रहे। उन्होंने इस ऐतिहासिक चिट्ठी को महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रशासन अब इस दस्तावेज को सुरक्षित रखने और डिजिटल रूप में संरक्षित करने की प्रक्रिया पर काम कर सकता है।

दुर्ग में मिली यह 91 साल पुरानी चिट्ठी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी भी स्वतंत्रता संग्राम और महात्मा गांधी के विचारों को करीब से जान सके।

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