10 गांवों में कृषि वैज्ञानिकों की चौपाल: किसानों को नई खेती तकनीकों की दी जानकारी
त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता

कृषि विभाग के उप सचांलक आशीष चंद्राकर ने बताया कि जिले में विकसित कृषि संकल्प अभियान अंतर्गत कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्यपालन के अधिकारियों द्वारा 10 टीमों का गठन किया है। गठित टीम के द्वारा आज 08 मई को ग्राम, सांकरा (ज), जामगांव (बी) विकासखण्ड बालोद, ग्राम गोरकापार, छेड़िया विकासखण्ड गुरूर, ग्राम कोपेडेरा, बम्हनी विकासखण्ड डौण्डी, ग्राम घीना, तुड़मुड़ा विकासखण्ड डौण्डीलोहारा, सरेखा एवं मोगरी विकासखण्ड गुण्डरदेही, जिले में कुल 10 ग्रामों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में 10 ग्रामों के 345 से अधिक किसान, वैज्ञानिक परिचर्चा में भाग लिए। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में ’विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अंतर्गत उन्नत तकनीक एवं नई किस्मों से किसानो को जागरूक किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती तथा जैविक खेती का प्रचार-प्रसार एवं मृदा के स्वास्थ्य को बनाये रखने जैविक खाद, जैव उर्वरक को प्रोत्साहित किया गया। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में फसलवार अनुशंसित मात्रा अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रोत्साहन हेतु वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ई-उर्वरक (टोकन प्रणाली) आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था के बारे में कृषकों को समझाईश दी गई तथा डी.ए.पी. के विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे 12ः32ः16, 20ः20ः13 एवं एसएसपी के उपयोग के संबंध में कृषकों को बताया गया। हरी खाद, जैव उर्वरक, नीलहरित काई, केचुआ खाद आदि के उपयोग से न केवल भूमि की दशा में सुधार होता है, अपितु उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। अतः कृषकों को रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ हरीखाद, जैव उर्वरक, नीलहरित काई, केचुआ खाद आदि के उपयोग करने के लिए समझाईस दी गयी। धान की कतार बोनी मशीन से बुआई एवं पैडी ट्रांसप्लांटर से धान की रोपाई जैसे उन्नत तकनीकी का प्रसार किया गया।

फसल चक्र परिवर्तन अंतर्गत धान के बदले अन्य लाभदायी फसल, जैसे दलहन, तिलहन, मक्का, लघु-धान्य फसलें इत्यादि के उत्पादन हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया गया। सिंचाई संसाधनों के समुचित उपयोग हेतु ड्रिप, स्प्रिंकलर एवं जल संरक्षण, संर्वधन के तकनीकों व एग्रीस्टेक परियोजना अंतर्गत कृषकों को समीपस्थ लोक सेवा केन्द्र के माध्यम से निःशुल्क फार्मर आईडी तैयार करने की जानकारी दिया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत ई-केवाईसी, आधार सीडिंग, सेल्फ रजिस्ट्रेशन के बारे में बताया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अन्तर्गत क्षतिपूर्ति के प्रावधानो से कृषकों को जागरूक किया गया। पूर्व वर्षों में कृषिगत गतिविधियों में परिलक्षित समस्याओं एवं वातावरणीय प्रभाव के आधार पर आगामी खरीफ की तैयारी हेतु सूचना, सलाह, सुझाव, समसामयिक जानकारी प्रदान किया गया। इसके अलावा कृषि तथा संबद्ध विभागों में संचालित केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई।

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