कोरोना से बचाव के लिए चीन के लोग भारतीय दवाओं के भरोसे

त्वरित खबरे

दिसंबर की शुरुआत में कोविड के सख्त नियमों में छूट देने के बाद से ही चीन में केस अचानक बहुत तेजी से बढ़े हैं। इससे वहां दवाओं और वायरस टेस्ट किट की डिमांड में उछाल आया है। यही वजह है कि दवाएं बनाने वाली कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं। कोरोना से बचाव के लिए चीन के लोग भारतीय दवाओं के भरोसे है।


त्वरित ने चीन में अपने सोर्सेस से वहां के शहरों के हालात पर बात की। इनमें यूनिवर्सिटीज के प्रोफेसर और रिसर्च स्कॉलर शामिल हैं। उन्होंने वहां के हालात को लेकर बहुत सी बातें बताईं, लेकिन नाम न देने की ताकीद भी की। ये रिपोर्ट उन्हीं लोगों के हवाले से…

बच्चे भी बीमार होने लगे, लोग योग करने के तरीके बता रहे
चीन में मरीजों की संख्या बढ़ने से दवाओं की कमी हो गई है। लोग मदद के तौर पर एक से दूसरे शहर दवाएं पहुंचा रहे हैं। छोटे बच्चों के संक्रमित होने के मामले भी सामने आए हैं। संक्रमण से हॉस्पिटलों में भीड़ और दवाओं की किल्लत की वजह से लोगों को झुकाव योग, ध्यान और शाकाहारी खाने की ओर बढ़ा है। सोशल मीडिया पर कई इसके तरीके और अनुभव शेयर कर रहे हैं।

कुछ वीडियो में लोग कोरोना से बचाव के लिए 'जलनेति' करने की सलाह दे रहे हैं। जलनेति का इस्तेमाल योगी रोग-मुक्त रहने के लिए करते थे। इसमें नाक के जरिए गले तक के रास्ते को साफ करने के लिए पानी का उपयोग होता है। माना जाता है कि इससे सांस नली की परेशानी, पुरानी सर्दी, दमा, सांस लेने में होने वाली समस्या दूर होती है। जलनेति से कोविड में कोई फायदा होता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। भास्कर इस तरह का कोई दावा नहीं करता है।


भारत की जेनरिक दवाएं 4 गुना तक सस्ती, इनकी काफी डिमांड
भारत की कंपनियां चीन को ज्यादा दवाएं देने के लिए तैयार हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग मेकर है। फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के चेयरपर्सन साहिल मुंजाल ने कहा है कि इबुप्रोफेन और पेरासिटामॉल के लिए दवा कंपनियों की क्वेरीज आ रही हैं। भारतीय जेनरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 4 गुना तक सस्ती हैं। इसलिए चीन में इनकी काफी डिमांड है।

स्टॉक की कमी, दुकानों से खरीदना मुश्किल
दवाओं के लिए चीन के लोग भारत की तरफ ही देख रहे हैं। चीन में भारत में बनी एंटी कोविड जेनरिक दवाएं खासतौर से फाइजर की दवा पैक्सलोविड चीन में सबसे ज्यादा बिक रही है। इसे लेने के लिए एक हफ्ते पहले बुक करना पड़ रहा है। भारतीय जेनरिक दवाओं के स्टॉक की कमी के कारण चीन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मेडिकल स्टोर्स ने प्री-सेल मोड शुरू कर दिया है।

इन दवाओं को दुकानों से खरीदना मुश्किल हो गया है। भारत से सीधे मंगाने में लगभग 15-20 दिन लगते हैं। एक व्यक्ति को सिर्फ दो बॉक्स दिए जा रहे हैं है। यहां तक ​​कि कुछ ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों ने भारी मांग की वजह से भारतीय जेनरिक दवाओं से जुड़े कीवर्ड्स ब्लॉक कर दिए हैं। ये ऐसा वक्त है, जब चीन में दवाएं गर्म केक की तरह बिक रही हैं।

सिर्फ हॉस्पिटल में मिल रही दवाएं
9 मार्च को चीनी दवा कंपनी सिनोफार्म ने चीन में पैक्सलोविड के जेनरिक वर्जन के डिस्ट्रिब्यूशन के राइट्स लिए थे। 17 मार्च को ड्रग्स की पहली खेप चीन पहुंची। इसके सिर्फ 21,200 बॉक्स थे। इन्हें आठ राज्यों में डिस्ट्रिब्यूट कर दिया गया। जिलिन, शंघाई और ग्वांगडोंग में तब कोरोना के केस ज्यादा मिल रहे थे।

अप्रैल में जब शंघाई में महामारी बढ़ी तो शंघाई फार्मास्युटिकल ग्रुप ने 20,000 बॉक्स और इम्पोर्ट किए। 13 दिसंबर को, चीनी सरकार ने घोषणा कर दी कि फाइजर की एंटी-कोविड ओरल दवाएं ऑनलाइन बेची जा सकती हैं। पर कुछ ही घंटों में पैक्सलोविड ऑनलाइन मिलनी बंद हो गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ये दवाएं सिर्फ हॉस्पिटल में ही मिल रही हैं।

गंभीर संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए पैक्सलोविड को बीमारी के शुरुआत में इस्तेमाल करना होता है। इसलिए लोग पहले से इसकी बुकिंग करा रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर बुजुर्गों को दवा की जरूरत पड़ी तो यह वक्त पर नहीं मिलेगी।

चीनी मार्केट में 4 तरह की एंटी कोविड भारतीय जेनरिक दवाएं
अभी चीनी बाजार में 4 तरह की एंटी-कोविड भारतीय जेनरिक दवाएं बेची जाती हैं। इनमें प्रिमोविर, पैक्सिस्टा, मोलनुनाट और मोलनाट्रिस शामिल हैं। इनमें से पहली दो फाइजर पैक्सलोविड की जेनरिक दवाएं हैं। पैक्सिस्टा का प्रोडक्शन भारतीय कंपनी हेटेरो की सहायक कंपनी अजीस्ता करती है। बाकी दो दवाएं मर्क के मोल्नुपिराविर के लिए जेनरिक हैं।

दूसरी ओर ब्रांडेड दवाओं की कीमतें आम लोगों के लिहाज से बहुत ज्यादा हैं। जर्मन दवा कंपनी मोल्नुपिराविर ने चीन में डिस्ट्रिब्यूशन के लिए एप्लिकेशन दी है। इसके एक बॉक्स की कीमत लगभग 4,722 युआन होने की उम्मीद है। एक युआन करीब 12 रुपए के बराबर होता है। ज्यादातर चीनी परिवार इतनी रकम देने में सक्षम नहीं हैं। इसकी तुलना में, भारतीय जेनरिक दवाओं के एक बॉक्स की कीमत 1 हजार से लेकर 1,600 युआन तक है। ये बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिल जाती हैं। यही वजह है कि चीन के लोगों के लिए ये अच्छा विकल्प बन गई हैं।

चीन में भारतीय जेनरिक दवाएं बेचना गैरकानूनी
हालांकि, चीन सरकार भारतीय एंटी-कोविड दवाओं को अप्रूवल नहीं देती है। चीन में भारतीय जेनरिक की बिक्री अब भी गैरकानूनी मानी जाती है और इनकी बेचने पर सजा मिलती है। इसके बावजूद चीनी डॉक्टर अनौपचारिक चैनलों से ये दवाएं खरीदने की सलाह दे रहे हैं।

अभी भारतीय दवाएं सोशल मीडिया के जरिए भी बिक रही हैं। या चीनी कंपनियां दूसरी कंपनियों से टाईअप करके इन्हें बेच रही हैं। हालांकि, कैंसर की कुछ दवाएं चीन में बेची जा सकती हैं।

भारतीय जेनरिक दवाओं पर सवाल, फिर भी डिमांड
चेतावनी और कार्रवाई के बावजूद इस साल अप्रैल से भारतीय जेनरिक दवाएं चीन, हांगकांग, मकाओ और ताइवान में बेहद पॉपुलर हो गई हैं। नवंबर में जीरो-कोविड पॉलिसी को अचानक वापस लेने के बाद इनके ऑर्डर में उछाल आया और एक महीने से भी कम समय में 50 हजार से ज्यादा बॉक्स बेचे जा चुके हैं।

चीनी एक्सपर्ट सवाल उठाते हैं कि ऐसा क्यों है कि तकनीकी तौर पर चीन से पीछे रहने वाला भारत सस्ती दवाएं बना पा रहा है, जो चीन पूरी ताकत लगाकर भी नहीं कर पा रहा। इस बीच लोग भारतीय जेनरिक दवाओं को अवैध, नकली, बड़े सुरक्षा खतरों के साथ अप्रभावी बताते हुए खारिज कर देते हैं, लेकिन उसका जोखिम भी उठाते हैं।

फिल्म में कैंसर की दवा का जिक्र, यह चीनी दवा के मुकाबले 7 गुना सस्ती
भारतीय जेनरिक दवाओं का मुद्दा पहली बार चीन में दो साल पहले ‘आई एम नॉट द गॉड ऑफ मेडिसिन’ नाम की एक हिट फिल्म से सुर्खियों में आया था। इसमें चीन में कैंसर मरीजों के सस्ती जीवन रक्षक दवाओं तक पहुंचने के संघर्ष को दिखाया गया था।

इसकी स्टोरी ड्रग ग्लीवेक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका इस्तेमाल क्रोनिक माइलोजेनस ल्यूकेमिया के मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है। चीन में इस दवा के ब्रांडेड वर्जन की कीमत लगभग 23,500 से 40,000 युआन/बॉक्स है। इसे मरीजों को आगे की पूरी जिंदगी हर महीने लेना होता है।

इससे यह चीन में ज्यादातर लोगों के लिए कुछ हद तक अप्रभावी हो जाती है। इसके ब्रांडेड वर्जन की 10 गोलियों के एक बॉक्स की कीमत 140 युआन है। वहीं भारतीय वर्जन का 100 गोलियों वाला बॉक्स सिर्फ 200 युआन में मिल जाता है। इसलिए चीन में इस दवा की भारी मांग है।

चीन में कोरोना के केस बढ़ने से दवाओं की कमी हो गई है। लोग सोशल मीडिया पर दवा न मिलने और कीमत से 200% तक महंगी मिलने की शिकायत करने लगे हैं। मशहूर हस्तियां भी अपनों का इलाज नहीं करा पा रही हैं। चीन के टीवी एक्टर वांग जिनसोंग ने बुधवार शाम को एक मैसेज में लिखा, ‘कोरोना की वजह से मैंने अपनी मां को खो दिया है। पिता को भी चार दिन से तेज बुखार था। दवाएं नहीं मिल रहीं, मैं बहुत मायूस हूं।’


चीन में कोरोना से हालात बिगड़ रहे हैं। चीन के अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे हैं। सामूहिक अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। इस बीच सरकार ने एक बार फिर बॉर्डर सील करना शुरू कर दिया है। युन्नान प्रांत में म्यांमार से सटे रुइली शहर में सीमा पार करने वालों पर नजर रखने के लिए कैमरे और अलार्म लगा दिए गए हैं। मोशन सेंसर और इलेक्ट्रिफाइड फेंसिंग भी लगाई गई है। 2021 में भी चीन ने सीमाएं सील कर दी थीं। उधर, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कोरोना का पीक इसी हफ्ते आएगा।