शारदा नगर में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह जारी है। चंद्रप्रकाश त्रिवेदी के निवास में चल रहे श्रीमद्भागवत के पांचवे दिन भगवताचार्य मेघानंद शास्त्री ने गजेंद्र मोक्ष, वामन अवतार व राम कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। शास्त्री ने कहा कि भगवान प्रत्येक युग व हर अवतार में मर्यादा का पालन करते हुए माता-पिता गुरु व आचार्यों को आदर व सम्मान देकर ज्ञान, सम्मान व संस्कार का आदर्श स्थापित किया है। भगवत कथा को केवल कथा की दृष्टि से नहीं सुनना चाहिए, बल्कि उस कथा को अपने जीवन में उतार कर अपने कर्मों में बदलाव लाना चाहिए।
इससे जीवन की दिशा और दशा में परिवर्तन आ सके। इसी में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। महाराज ने कहा ऐसे ही शिक्षा व संस्कार हमें अपने घरों व परिवारों में देनी चाहिए, जिससे समाज को सनातन संस्कृति, संस्कार व गुरु परंपरा से परिचय कराई जा सके। इसके लिए हमें सदैव पुराणों व महापुरुषों की जीवनी का अध्ययन करते रहना चाहिए। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के लोग पहुंच रहे हैं।
पयो व्रत करने से होती है धर्म परायण पुत्र की प्राप्ति
आचार्य मेघानंद शास्त्री ने वामन अवतार कथा प्रसंग की महत्ता बताते हुए कहा कि माता अदिति ने पयो व्रत कर भगवान वामन को प्राप्त किया था ।जिन्होंने राजा बलि जैसे महा-दानी का उद्धार किया। महाराज ने कहा इस व्रत को फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के प्रारंभ में एकम से द्वादश तिथि यानी 12 दिन तक किया जाता है। इस व्रत में दूध व फलाहार कर नियम व संयम पूर्वक करने से भगवान स्वयं कृपा करते हैं। जिससे आदर्श, तेजस्वी व धर्म परायण पुत्र की प्राप्ति होती है।