भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने में गन्ना लदे ट्रैक्टर ट्रालियों की तौलाई के लिए धर्मकांटा लगा है। इस धर्मकांटा के तौल पर किसानों को शक है। किसानों ने धर्मकांटा पर सही तौल नहीं बताने की शिकायत कारखाना प्रबंधन से की। शक दूर करने कारखाना प्रबंधन ने धर्मकांटा पर 50-50 किलो के 196 लोहे के बाट रखकर जांचा।
धर्मकांटा पर रखे गए 196 लोहे के बाट का कुल वजन 9800 किलो होना था, लेकिन मशीन में यह 50 किलो तक कम होना बताया। इस पर किसानों ने धर्मकांटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। किसानों का कहना है कि तौल में गड़बड़ी से उनका भारी नुकसान हो रहा है। इसे बंद किया जाए। तौल की उचित व्यवस्था की जाए।
मौके पर पंचनामा तैयार किया गया, जिस में कारखाने के क्रेन मैनेजर केके यादव और भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि जिला सह मंत्री जयचंद वर्मा, बोड़ला ब्लॉक अध्यक्ष उमेश वर्मा, कवर्धा ब्लाक अध्यक्ष सोनी वर्मा समेत अन्य किसानाें ने दस्तखत किए।
जो लोहे के बाट जांचने में उपयोग, वह कारखाने का
मौके पर उपस्थित नाप-तौल अधिकारी ने धर्मकांटा की विश्वसनीयता जांचने के लिए उपयोग लोहे के बाट के वजन पर ही सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोहे के बाट का वजन भी तो कम हो सकता है। इस पर किसान संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि धर्मकांटा की जांच के लिए जो लोहे के बाट उपयोग किए गए, वे भोरमदेव और सरदार वल्लभ भाई पटेल कारखाने के ही हैं।
गुड़ फैक्ट्रियों में भी तौल मशीनों की जांच कराने की मांग
जिले में लगभग 300 गुड़ फैक्ट्री संचालित है। भारतीय किसान संघ ने इन फैक्ट्रियों में भी कांटों का जांच सत्यापन कराने मांग की है। क्योंकि ज्यादातर किसान बाहर के कांटे से गन्नाें का तौल कराकर कारखाना लाते हैे और ये दावा किया जाता है कि कारखाने के कांटे में 3 से 4 क्विंटल कम वजन बताता है।