रायपुर। छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर एक बार फिर 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी में हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से सरकार को मांगों के निराकरण के लिए समय दिया गया था। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में डॉक्टरों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
आंदोलन के तहत 21 सितंबर से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार करने की बात कही गई है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर 23 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं का भी बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई है। इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों की नियमित चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
स्टाइपेंड बढ़ाने की प्रमुख मांग
जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांग MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी है। डॉक्टरों की ओर से स्टाइपेंड को मौजूदा राशि से बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है।
इसके अलावा PG रेजिडेंट, बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर/जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट के वेतन एवं मानदेय में संशोधन की मांग भी शामिल है। साथ ही DM और MCH जैसे सुपर-स्पेशलिटी कोर्स के रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में संशोधन की मांग की गई है।
17 सूत्रीय मांगों में मुख्य मुद्दे
डॉक्टरों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में मुख्य रूप से—
MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में सम्मानजनक बढ़ोतरी।
PG रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड/मानदेय में संशोधन।
बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट एवं मेडिकल ऑफिसर के वेतन-मानदेय में वृद्धि।
सीनियर रेजिडेंट के स्टाइपेंड में संशोधन।
DM और MCH सुपर-स्पेशलिटी रेजिडेंट के स्टाइपेंड में सुधार।
डॉक्टरों से जुड़ी वेतन विसंगतियों का निराकरण।
बॉन्ड से संबंधित लंबित मामलों का समाधान।
मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में चिकित्सा संसाधनों में सुधार।
डॉक्टरों की कार्य-परिस्थितियों को बेहतर करने की मांग।
चिकित्सा सेवाओं और डॉक्टरों से जुड़े लंबित प्रकरणों का जल्द निराकरण।
शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में 17 सूत्रीय मांगों के सभी बिंदुओं की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऊपर केवल रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से बताए गए प्रमुख मुद्दे दिए गए हैं।
19 अगस्त को हुई थी स्वास्थ्य मंत्री से बैठक
जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक, 19 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ स्टाइपेंड को लेकर बैठक हुई थी। बैठक के बाद डॉक्टरों ने आंदोलन स्थगित किया था। डॉक्टरों का कहना है कि आश्वासन के बावजूद अब तक स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर ठोस सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है।
अब डॉक्टरों ने दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाया है। फिलहाल 21 सितंबर से OPD बहिष्कार और 23 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। आगे की स्थिति सरकार और डॉक्टर प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत तथा मांगों पर लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।