शीतलहर की चपेट में पूरा छत्तीसगढ़,

त्वरित ख़बरें - उत्तर के अम्बिकापुर से अधिक ठंडा हुआ दूर दक्षिण का नारायणपुर; बलरामपुर में सबसे कम 3 डिग्री पारा

शीतलहर की चपेट में पूरा छत्तीसगढ़-चिल्फी घाटी में बर्फ की चादर ,

उत्तर दिशा की ओर से शुष्क और ठंडी हवाओं के आने से छत्तीसगढ़ का पूरा भौगोलिक क्षेत्र इस समय शीतलहर की चपेट में है। अपनी सर्द रातों के लिए प्रसिद्ध अम्बिकापुर से अधिक ठंडा दूर दक्षिण का नारायणपुर कस्बा रहा। सरगुजा के बलरामपुर में न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। यह इस सीजन में प्रदेश का सबसे कम तापमान हो गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने जानकारी दी है कि बलरामपुर के ARG (स्वचालित वर्षामापी) केंद्र में न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। यह अब तक का सबसे कम तापमान है। वहीं जशपुर के डुमरबहार कृषि विज्ञान केंद्र में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री और कोरिया कृषि विज्ञान केंद्र में 4.8 डिग्री सेल्सियस मापा गया है। एक दिन पहले तक यहां न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस था।

अम्बिकापुर में तापमान लगभग स्थिर है। वहां न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहां से 575 किलोमीटर दक्षिण स्थित नारायणपुर उससे भी ठंडा रहा। नारायणपुर में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में नारायणपुर में इतना कम तापमान दर्ज नहीं हुआ है।

नारायणपुर से 122 किमी दक्षिण-पूर्व स्थित जगदलपुर में पिछले 10 सालों में दिसंबर के न्यूनतम तापमान का रिकॉर्ड 5.5 डिग्री सेल्सियस है। यह 31 दिसंबर 2018 को दर्ज हुआ था। वैसे 19 दिसंबर 1945 को यहां 3.9 डिग्री सेल्सियस का न्यूनतम तापमान दर्ज हो चुका है। यह अभी तक का सबसे कब तापमान है। वहीं अम्बिकापुर का सर्वकालिक रिकॉर्ड 1.7 डिग्री सेल्सियस है। यह न्यूनतम तापमान 26 दिसंबर 1955 को रिकॉर्ड किया गया था।

अधिकांश क्षेत्रों के तापमान में मामूली वृद्धि

प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में मामूली वृद्धि हुई है। मंगलवार की तुलना में बिलासपुर का न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। वहीं रायपुर 0.6 डिग्री, पेण्ड्रा रोड-जगदलपुर में 0.5-0.5 डिग्री, दुर्ग 0.4 डिग्री और राजनांदगांव 0.3 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हुए हैं। जशपुर, कोरिया, कोरबा, धमतरी और महासमुंद में भी तापमान बढ़ा है।

                                                            प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह-सुबह खुले खेतों ओस जम गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने दी बचाव की सलाह

  • आपातकालीन आपूर्ति जैसे भोजन, पानी, ईधन, बैटरी चार्जर, आपातकालीन प्रकाश और साधारण दवाओं की पहले से ही व्यवस्था कर लें।
  • घर में ठंडी हवा का प्रवेश रोकने के लिए दरवाजें और खिड़कियों को ठीक से बंद रखें।
  • ​जितना हो सके घर के अंदर रहे और ठंडी हवा, बारिश, बर्फ के संपर्क में नहीं आने के लिए कम यात्रा करें।
  • एक परत वाले कपड़े की जगह ढीली फिटिंग वाले परतदार हल्के कपड़े, हवा रोधी, सूती बाहरी आवरण और गर्म ऊनी भीतरी कपड़े पहने। तंग कपड़े खून के बहाव को रोकते हैं, इनसे बचें।
  • खुद को सूखा रखें, शरीर की गरमाहट बनाए रखने के लिए अपने सिर, गर्दन, हाथ और पैर की उंगलियों को पर्याप्त रूप से ढके। गीले कपड़े तुरंत बदले।

सेहत ठीक रखने के लिए भी यह उपाय

  • पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पीएं, इससे ठंड से लड़ने के लिए शरीर में गर्मी बनी रहेगी।
  • तेल, पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज करें।
  • फ्लू, नाक बहना, भरी नाक या नाक बंद जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना आमतौर पर ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होती हैं। इस तरह के लक्षणों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतें और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों या डॉक्टर से परामर्श लें।

                                                                   कबीरधाम जिले में यह फूल ठंठ की वजह से जम सा गया।

बुजुर्गों-बच्चों और बीमारों की खास देखभाल की जरूरत

  • बुजुर्गों, नवजात शिशुओं और बच्चों का ध्यान रखें। ऐसे पड़ोसी जो अकेले रहते हैं, विशेषकर बुजुर्गों का हालचाल पूछते रहें।
  • कमरों को गर्म करने के लिए कोयले का प्रयोग न करें। अगर कोयले और लकड़ी को जलाना आवश्यक है तो उचित चिमनी का प्रयोग करें। बंद कमरों में कोयले को जलाना खतरनाक हो सकता है।
  • शराब न पीएं। यह शरीर की गर्माहट को कम करती है। यह खून की नसों को पतला कर देती है, विशेषकर हाथों से जिसमें हाईपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है।

               पौधों पर पाले का असर साफ-साफ देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने किसानों को इससे बचने के उपाय बताए हैं।

इस मौसम से फसलों के लिए ये उपाय प्रभावी

  • जब भी पाले की संभावना हो या मौसम विभाग से पाले की चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिंचाई कर दें। इससे तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर और पैरे से ढक दें। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, जिससे सतह का तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंच पाता और पौधे पाले से बच जाते हैं।
  • अपनी फसल को पाले से बचाने के लिए खेत में धुंआ कर दें। इससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है।
  • जिस दिन पाला पड़ने की संभावना हो, उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1% घोल का छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए इसे एक हजार लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टर क्षेत्र में प्लास्टिक के स्प्रेयर से छिड़कें।
  • सल्फर 90% WDG पाउडर को 3 किलोग्राम 1 एकड़ में छिड़काव करने के बाद सिंचाई करें।
  • सल्फर 80% WDG पाउडर को 40 ग्राम प्रति पंप; 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें ।

चिल्फी घाटी कवर्धा सुबह का नजारा बर्फ की चादर नजारा