सरकारी स्कूलों में दोहरी तस्वीर: हिंदी मीडियम में टाटपट्टी, अंग्रेजी मीडियम में बेंच पर पढ़ाई
त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

सरकारी शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर असमानता की तस्वीर सामने आई है। एक ही परिसर या समान सरकारी स्कूल प्रणाली के भीतर छात्रों को अलग-अलग सुविधाएँ मिलती नजर आ रही हैं। हिंदी मीडियम स्कूलों में जहां बच्चे अब भी टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में छात्रों को बेंच और डेस्क जैसी बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

यह अंतर केवल बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों के असमान वितरण को भी उजागर करता है। कई जगहों पर हिंदी मीडियम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी देखी जा रही है, जैसे उचित फर्नीचर, स्वच्छ कक्षाएं और आधुनिक शिक्षण सामग्री। वहीं अंग्रेजी मीडियम स्कूलों को अपेक्षाकृत बेहतर ढांचा और सुविधाएँ मिल रही हैं, जिससे छात्रों के सीखने के माहौल में भी फर्क दिखाई देता है।

अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी बच्चों को समान शिक्षा और समान सुविधाएँ मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी मीडियम में पढ़ रहे हों। शिक्षा का अधिकार सभी के लिए बराबर है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह समानता अभी भी पूरी तरह से नजर नहीं आती।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति न केवल बच्चों के आत्मविश्वास पर असर डालती है, बल्कि सीखने की गुणवत्ता में भी अंतर पैदा करती है। सरकार द्वारा समय-समय पर शिक्षा सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी कई सवाल खड़े करती है।

अब जरूरत इस बात की है कि सभी सरकारी स्कूलों में समान आधारभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि किसी भी बच्चे के साथ शिक्षा के स्तर पर भेदभाव न हो और हर छात्र को एक समान अवसर मिल सके।

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