11 जुलाई 2022
रणबीर कपूर पर इस साल दो बड़ी फिल्मों ‘शमशेरा’ और ‘ब्रह्मास्त्र’ का बड़ा दांव लगा हुआ है। वे एक्साइटेड भी हैं, लेकिन बेहद शांत हैं। ‘शमशेरा’ में उनका डबल रोल है। इस साल उनकी खुशी की डबल वजह भी है। बड़ी फिल्मों की रिलीज के साथ वो इस साल फादरहुड भी एन्जॉय कर सकते हैं। ‘शमशेरा’ में वो पहली बार डबल रोल बल्ली और शमशेरा भी प्ले कर रहें हैं। रणबीर ने अपनी खुशी और जज्बात दैनिक भास्कर से शेयर किए हैं। पेश है बातचीत का प्रमुख अंश:
‘शमशेरा’ के लिए राजी कैसे हुए?
सिंपल प्रॉसेस था, आदित्य चोपड़ा ने मुझे कॉल किया। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास एक स्क्रिप्ट आई है, पर उसके बारे में तुम्हें कुछ नहीं बोलने वाला। तुम ऑफिस आ जाओ।’ मैं उनके पास गया। दरवाजा खोला तो सामने डायरेक्टर करण मल्होत्रा थे। मैं चौकन्ना हो गया कि करण यहां यशराज में कैसे? (दरअसल करण लंबे अरसे तक धर्मा प्रोडक्शंस के साथ जुड़े थे। ऋतिक की अग्निपथ उन्होंने ही डायरेक्ट की थी।) वहीं स्क्रिप्ट सुनने के बाद वहीं मैंने हां कह दिया। वह इसलिए भी कि ऐसी फिल्में मुझे कभी ऑफर नहीं हुई थीं, जो मल्टी जॉनर वाली हों। इन दिनों वैसी फिल्में हिंदी में कम बन रही हैं।
‘शमशेरा’ और ‘ब्रह्मास्त्र’ दोनों एक्शन जॉनर की हैं, पर आप का ऑब्सेशन कभी सिक्स पैक एब्स पर नहीं रहा?
दरअसल हर फिल्म की रिक्वॉयरमेंट अलग होती है। ‘संजू’ में मुझे अर्ली 20 से लेकर लेट 40 वाली उम्र के संजय दत्त को प्ले करना था। वहां मैंने वेट गेन किया था। ‘शमशेरा’ को लेकर करण मल्होत्रा का ब्रीफ था कि वजनी डोले शोले वाला इंसान नहीं चाहिए। उसके बजाय एक टफ लुकिंग इंसान हो। बल्ली जेल में पला बढ़ा है। उसकी बॉडी वर्कर्स जैसी चाहिए।
उसी दौरान ‘ब्रह्मास्त्र’ भी शूट कर रहा था। तो वहां मुझे सिक्स पैक एब्स मेंटेन करना पड़ा। यहां वेट गेन करना पड़ता था। यहां मैंने पांच किलो वेट गेन किया। हालांकि फिल्म का सेलिंग पॉइंट एक्टर की बॉडी नहीं होनी चाहिए। मैं वैसा एक्टर नहीं, जिसने शर्ट उतारे हों। जब मौका मिलेगा, वह भी करूंगा, मगर ‘शमशेरा’ उस टाइप की पिक्चर नहीं।
आप पर इस साल दो बड़ी फिल्मों का बोझ है। आप क्या मान रहे हैं?
ये मेरे लिए गलत स्टेटमेंट होगा। बेशक दो मेगाबजट फिल्मों का मैं हिस्सा हूं। पर इसे बहुत लोगों ने बड़ी मेहनत से बनाया है। यहां करण हैं, उनका क्रू है। 'ब्रह्मास्त्र’ में अयान और उनकी टीम है। आलिया, बच्चन साहब, नागार्जुन सर हैं। मैं ये नहीं कह सकता कि फिल्म मेरी वजह से चली या नहीं चली तो मेरी वजह से नहीं चली। साथ ही हम एक्टर लोग सिर्फ फिल्मों की रिलीज के वक्त ही नर्वसनेस फील नहीं करते।
सेट पर आता हूं तो जेहन में यह नहीं होता कि अरे करियर में कुछ हिट्स दी हैं तो आगे भी फलां सीन तो फाडू कर ही लूंगा। हर दिन हम खुद से जूझते हैं कि फलां सीन कर सकूंगा कि नहीं? जब कभी लगता है कि अरे क्या कमाल सीन शूट किया है तो उससे जुड़ी फिल्म रिलीज होने पर बकवास होती है। तो मैं ओवरकॉन्फिडेंस में नहीं रहता।
फिल्म से अटैच्ड कितना रहते हैं?
एक फिल्म पूरी कर दूसरी में चले जाते हैं। तो शूट खत्म होते ही डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के मुकाबले हम जरा जल्दी डिसकनेक्ट हो जाते हैं। हां, फिर जब शूट कंप्लीट होने के अमूमन चार महीने बाद(शमशेरा के मामले में डेढ़ साल बाद) तो फिर से किसी फिल्म से रीकनेक्ट होते हैं। फिर से वह फीलिंग आती है। बट जो ये रिलीज का पीरियड होता है, वह मुझे पसंद नहीं। मैं चाहता रहता हूं कि भई फिल्म शूट कर ली, मगर वह रिलीज न हो। न जाने उसका क्या हाल होगा?
आप की एक फिल्म हिट होती है तो आप को बहुत बड़ा स्टार कह दिया जाता है। फ्लॉप होने पर करियर का मर्सिया लिख दिया जाता है। मैं सुन रहा हूं कि 'शमशेरा’ मेरी कमबैक पिक्चर है। पर मैं गया ही कहां था, जो इसे मेरी कमबैक पिक्चर लोग कह रहे। 'संजू’ तो चली ही थी। ऐसा नहीं है कि मेरी सात आठ फ्लॉप हो गईं और तब 'शमशेरा’ आ रही। ऐसे टैग्स तो मिलते रहते हैं। इससे पहले मैंने लाइफ में 16 फिल्में की हैं। इससे चैलेंजिंग फिल्म कोई रही नहीं है।

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