फर्जी खाता खोलकर सवा 3 करोड़ किए गबन, कलेक्टर ने FIR दर्ज कराने के दिए निर्देश , समाज कल्याण विभाग का मामला  रिटायरमेंट के बाद संविदा पर कुर्सी संभालकर की हेराफेरी.....
त्वरित ख़बरें - दीपमाला शेट्टी रिपोर्टिंग

गरियाबंद (छ.ग) समाज कल्याण विभाग में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जहां एक पूर्व उपसंचालक ने सेवानिवृत्ति के बाद संविदा के आधार पर पद पर बने रहकर करोड़ों रुपए का दुरुपयोग किया। उन्होंने गरियाबंद और धमतरी के बैंकों में विभाग के नाम पर फर्जी खाते खुलवाए और तीन वर्षों में 3.25 करोड़ रुपए का गबन कर लिया। 

अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय द्वारा की गई जांच में यह घोटाला उजागर हुआ। इसी के आधार पर कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने तत्कालीन उपसंचालक एल. एस. मार्को और डीडीओ प्रभारी मुन्नीलाल पाल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं।

शिकायत से हुआ घोटाले का पर्दाफाश

रायपुर निवासी कुंदन ठाकुर ने जुलाई में इस घोटाले की लिखित शिकायत कलेक्टर को दी थी। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर जांच प्रारंभ की गई, जिसका नेतृत्व अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय कर रहे थे। अगस्त में शुरू हुई इस जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों को तीन बार समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। 

जब समिति ने सरकारी दस्तावेजों की गहन समीक्षा की, तो पता चला कि 2016 से 2019 के बीच बिना कलेक्टर की स्वीकृति के रायपुर संचलनालय से जागरूकता अभियान, पेंशन योजना, दिव्यांग प्रोत्साहन योजना और पुनर्वास शिविर जैसी योजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत कराई गई। यह राशि विभाग के आधिकारिक खाते में न भेजकर धमतरी और गरियाबंद के निजी बैंकों में खोले गए फर्जी खातों में डलवाई गई, जहां से चेक के माध्यम से इसे निकाला गया। जांच में रायपुर संचलनालय के तत्कालीन संचालक पंकज वर्मा की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई है।

9 चेकों के जरिए निकाले गए सवा 3 करोड़

26 सितंबर 2016 को यूनियन बैंक, रायपुर से 22 लाख रुपए का चेक निकाला गया। 24 नवंबर 2017 को पंजाब नेशनल बैंक, रायपुर से 25 लाख रुपए निकाले गए। 22 जून 2018 को तीन अलग-अलग चेकों के माध्यम से 28 लाख, 28 लाख और 27 लाख रुपए यानी कुल 83 लाख रुपए निकाले गए। एक मार्च 2019 को कोटक महिंद्रा बैंक से 48 लाख और 10 मार्च 2019 को 49 लाख रुपए का चेक जारी किया गया। इसके अलावा, 19 अगस्त 2019 को 49 लाख 50 हजार और 20 अगस्त 2019 को 49 लाख रुपए की निकासी की गई।

धमतरी में भी 8 करोड़ रुपए के घोटाले की संभावना

गरियाबंद में उजागर हुए 3.25 करोड़ रुपए के इस घोटाले के बाद अब धमतरी में भी 8 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, घोटाले के मुख्य आरोपी मुन्नीलाल पाल ने 2012 से 2022 तक धमतरी में विभिन्न पदों पर कार्य किया था। संभावना है कि वहां भी इसी तरह फर्जी बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपए का गबन किया गया है। यदि धमतरी में भी विस्तृत जांच कराई जाती है, तो गरियाबंद से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations