जिला अस्पताल में लाया गया नया जनरेटर,
त्वरित ख़बरें - जिला अस्पताल के सर्जिकल विंग के लिए 8 वां जनरेटर पहुंचा ट्रांसफॉर्मर भी लगा,

बिजली चली जाने पर जिला अस्पताल में हर घंटे 100 लीटर ज्यादा डीजल खर्च होने लगा है। क्योंकि कोरोना के बाद से यहां दो-दो ऑक्सीजन प्लांट लगाने पड़े हैं। बिजली जाने पर दोनों को चलाने के लिए 250 केवीए के अलग-अलग दो जनरेटर इंस्टॉल किया गया है। 50 केवीए का एक जनरेटर यहीं बनी वायरोलॉजी लैब में भी लगा है। तीनों को एक साथ चलाने पर हर घंटे औसतन 100 लीटर डीजल की लगना है।

वायरोलॉजी लैब अभी हाल ही शुरू की गई है, जबकि ऑक्सीजन प्लांट इंस्टालेशन के बाद से ही चल रहे हैं। इन तीनों जनरेटरों से पहले बिजली जाने पर जिला अस्पताल का काम वहां पहले से लगे पांच जनरेटरों को चलाने से ही हो जा रहा था। पांचों जनरेटरों की क्षमता कम होने के कारण तब औसतन 60 लीटर डीजल हर घंटे लग रहा था। नए लगे तीनों जनरेटरों की क्षमता हर घंटे 160 लीटर खर्च होने लगी है।

जिला अस्पताल में बिजली गुल होने पर भी नहीं होगी दिक्कतें

  • 25 केवीए-मदर चाइल्ड यूनिट की ओटी में स्थापित किया गया है, ताकि परेशानी न हो।
  • 125 केवीए- मदर चाइल्ड यूनिट में आपूर्ति
  • 75 केवीए- जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगाया गया है, इसका उपयोग जारी है।
  • 125 केवीए- ट्रामा सेंटर व उसमें बनी ओटी के लिए लगाया गया है, उपयोग हो रहा है।
  • 125 केवीए- सर्जिकल विंग में बने पांच वार्डों के लिए अलग से लगाया गया है।
  • 50 केवीए- वायरोलॉजी लैब में लगी मशीनों के लिए जनरेटर स्थापित किया गया है।
  • 250 केवीए- मदर चाइल्ड यूनिट के ऑक्सीजन प्लांट के लिए जनरेटर लगा।
  • 250 केवीए- जिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट में उपयोग लाया जा रहा है।

मदर चाइल्ड यूनिट के जनरेटर ऑटोमेटिक
जिला अस्पताल में लगे इन 8 जनरेटर में मदर चाइल्ड यूनिट के दोनों जनरेटर सबसे अलग है। यहां की जरूरत को देखते हुए दोनों जनरेटर पूर्णत: ऑटोमेटिक हैं। बिजली जाते ही ये स्वत: स्टार्ट हो जाते हैं, आने के बाद खुद बंद हो जाते हैं। डीजल कम होने पर इसे एलॉर्मिंग सिस्टम भी लगाया गया है। इनसे यहां रेगुलर आपूर्ति बनी रहती है।

कुल 1025 केवीए के जनरेटर चलाने पड़ रहे, ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो
जिला अस्पताल में लगे सभी आठों जनरेटर की क्षमता 1025 केवीए होती है। इतनी क्षमता का एक जनरेटर भी लगाया जा सकता है। लेकिन छोटे-छोटे जनरेटर होने से रिस्क कम है। एक जगह के जनरेट में कोई खराबी आती है, तो दूसरे जनरेटर से आपूर्ति कर दी जाती है। आठ की संख्या में जनरेटर होने से जिला अस्पताल में पॉवर की कमी नहीं है।

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