गौठान का हो रहा कायाकल्प, अदरक, हल्दी, नेपियर घास की खेती के साथ, बदक, कुक्कुट, मच्छली पालन की हुईदुर्ग
29 अप्रैल। नगर पालिक निगम, दुर्ग क्षेत्र में संचालित शासन के मंशा के अनुरूप महती व महत्वकांक्षी योजना पुलगांव स्थित गौठान का कायकल्प हो रहा है । कल्याणम् महिला स्व0-सहायता समूहों की देख-रेख में नगर निगम की अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों की सतत् निगरानी एवं माॅनिटरिंग से गौठान में नित नये नवाचार हो रहे है । गो-पालन के साथ-साथ मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, बदक पालन के अलावा नेपियर घास, अदरक हल्दी की खेती शुरूवात हो चुकी है । फलदार वृक्ष, आम, पपीते की पौधा रोपण कर गौठान क्षेत्र को संरक्षित किया जा रहा है । गौठान संचालन कर रही कल्याणम् महिला स्व0-सहायता समूह के द्वारा यह कार्य सुचारू रूप से संचालित की जा रही है । जो खेती की शुरूवात हुई है उसका परिणाम आने वाले छः माह में समिति को लाभ मिलना शुरू हो जायेगा । इस तरह यह गौठान महिला समूह की आजिविका का एक कारगर संसाधन बनने जा रहा है । गौठान द्वारा वर्तमान में धूप, बत्ती, दिये, गमले, गोनाईल (फिलायल), पंचदीप, दंत मंजन का निर्माण किया जा रहा है । जिससे समूह की महिलाओं को आर्थिक लाभ अर्जित हो रहा है । वर्तमान में कल्याणम् महिला स्व0-सहायता समूह द्वारा गौठान में 260 गायों की देखभाल की जा रही है । सतत् निगरानी के अलावा इन गौवंशो को समय-समय पर चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराया जा रहा है, गौवंश को आवश्यकता अनुसार चारा, पानी दी जाती है व समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है । इन गौवंशो की देख-रेख के लिए दो पहटिया है जिनके द्वारा नियमित और निरंतर निगरानी रखी जाती है तथा बीमार पशुओं को तत्काल चिकित्सा मुहैय्या कराई जाती है, इसके अलावा एक व्यक्ति प्रबंधक के तौर पर गौठान का देख-रेख के लिए तैनात है जोकि पूरा समय यहां देते है । नगर निगम क्षेत्र के पुलगांव स्थित गौठान का संचालन कल्याणम् महिला स्व0-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है । इसके अलावा महापौर श्री धीरज बाकलीवाल व आयुक्त श्री हरेश मंडावी की दिशा-निर्देश में एक पांच सदस्यीय संचालन समिति गठित की गई है । इस समिति में एम आई सी सदस्य, एल्डरमैन, पार्षद व महिला समूह की एक सदस्य शामिल है । कल्याणम् महिला स्व0-सहायता समूह की महिलाएं द्वारा रोजगार मुलक पंचदीप, धूपबत्ती गमले के साथ, गोबर के कण्डे का भी निर्माण किया जाता है, इस कण्डे का उपयोग वर्तमान में शिवनाथ नदी स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए किया जाता है । इस कण्डे के नियमित उठाव होने से समूह की महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है। शुरूवात

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