संविधान दिवस के अवसर पर सुराना लॉ कॉलेज में न्यायाधीश द्वारा प्रेरक उद्बोधन...
त्वरित ख़बरें - सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

दुर्ग : संविधान दिवस के पावन अवसर पर दुर्ग स्थित सेठ रतन चंद सुराना लॉ कॉलेज में आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला न्यायालय दुर्ग के प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने छात्र-छात्राओं एवं संकाय सदस्यों को संविधान की महत्ता और उसके मूल उद्देश्यों से अवगत कराते हुए प्रेरक उद्बोधन दिया।अपने वक्तव्य में न्यायाधीश ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक आकांक्षाओं, मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों का जीवंत प्रतीक है। यह प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के साथ जीवन जीने की शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और अदम्य संकल्प का स्मरण करते हुए कहा कि आज का दिन हमें उनके त्याग और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण को सम्मान देने का अवत्तर प्रदान करता है।न्यायाधीश ने कहा कि विधि-विद्यार्थियों का दायित्व केवल विधिक प्रावधानों को जानना भर नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों न्याय, समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और भ्रातृत्व को अपने आचरण और जीवन में उतारना भी है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे संविधान की भावना को समझकर सामाजिक न्याय, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के साथ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दें।कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने संविधान के इतिहास, महत्व तथा नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों से संबंधित विचारों को गंभीरता से सुना। सेठ रतन चंद सुराना लॉ कॉलेज के प्राचार्य एवं संकाय सदस्यों द्वारा न्यायाधीश के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उक्त कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का संयुक्त रूप से वाचन भी किया गया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव, सेठ रतन चंद सुराना लॉ कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षकगण, छात्रगण तथा पैरालीगल वालेंटियर उपस्थित रहे।

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