भिलाई / अब तो भाई बात न्याय की हो रही है तो इसमें हैरानी होने की जरा भी शंका नही है एक थानेदार अपने आप को एक न्यायाधीश से भी ऊपर समझने लगा खुद ही न्याय करने लगा पर थानेदार या भूल गया कि न्याय की मूर्ति कहे जाने वाले न्यायाधीश होते हैं जो न्याय करने के लिए बैठे हुए हैं पर यहाँ तो थाना प्रभारी ही अपने आप को न्यायाधीश मान लिए है मामला है भिलाई के नेहरु नगर की जिसमे दो पक्ष वादी एवं प्रतिवादी है वादी महिला है एवं प्रतिवादी पुरुष है मामला घर बेचने लेने से संबन्धित है जिस मकान की चर्चा हो रही है उसमे वादी द्वारा अपना अखबार कार्यालय का संचालन किया जा रहा है जिसमे वादी द्वारा प्रतिवादी को लाखो रूपये घर लेने के नाम से दिया जा चूका है पर रूपये लेने के बाद प्रतिवादी मुकर गया और अपने पहुच का इस्तेमाल करते हुए वादी को जैसे भी हो परेशान करने का सोच डाला सबसे पहले मकान में आग लगने की घटना घटी जिसमे वादी के रिसेप्शन कार्यालय जलकर पूरी तरह खाख हो गया | जिस पर वादी ने संबंधित थाना में लिखित शिकायत दिया घर मरम्मत करने में वादी ने अपना जमा पूंजी लगाया उस चीज से उभर ही रहे थे की प्रतिवादी ने मकान का बिजली कलेक्शन कटवा दिया | जिससे वादी को और सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जिसमे पीने की पानी प्रमुख समस्या थी और अखबार के सारे कामकाज रुक गये | इस समस्या से भी उभर रहे ही थे की दिनांक 10/12/2021 को प्रतिवादी अपने रिश्तेदार और अपने साथ 4 लड़कियां और 8 से 10 गुंडे लेकर घर में घुस गया घर में निवास कर रहे है एक वृद्ध व्यक्ति जिसको वादी ने अपने कार्यालय में रहने के लिए शरण दिया हुआ था उनको घर से बाहर निकाल दिया एवं अन्दर से ताला बंद कर दिया | घर के अन्दर लड़की एवं गुंडे लेकर प्रतिवादी ताला बंद कर घुसा तब बुजुर्ग व्यक्ति ने कॉल करके वादी को इसकी जानकारी दी मौके पर थोड़े ही समय में वादी अपने सह कर्मचारियों के साथ पहुंची तो देखती है की उसका पूरा अख़बार कार्यालय में तोड़ फोड़ किया जा रहा है कार्यालय में लगे हुए बैनर पोस्टर फाड़कर फेक दिया गया है और कार्यालय अन्दर का सामान भी बाहर फेका जा रहा है वादी के आँखों के सामने उसका कार्यालय तहस नहस किया जा रह था जिसका विरोध वादी एवं उसके कर्मचारियों ने किया पर प्रतिवादी किसी का नही सुन रहा था सामान फेके ही जा रहा था वादी ने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 100 में कॉल किया और सहायता मांगी एवं नजदीकी थाना में भी कॉल कर मद्दत मांगी साथ ही महिला हेल्पलाइन 181 से भी मद्दत मांगी | महिला हेल्पलाइन वालो ने अपने नजदीकी थाने में कॉल करने को कहा वादी द्वारा वैसा ही किया गया पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीयों को भी इसकी जानकारी दिया गया क्युकी वादी के सामने उसके कार्यालय का तोड़फोड़ किया जा रहा था वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया कुछ समय पश्चात् मौके पर पुलिस की 112 की गाड़ी पहुची जो की थाने की थी और भी 2 से 3 पुलिस की गाड़ी पहुची पर सभी पुलिस कर्मी मूकबधिर होकर खड़ी रही वादी ने तैनात पुलिसकर्मियों से मद्दत की गुहार लगाई तब पुलिसकर्मीयो ने कहा की उनके अधिकारी का आदेश नही है की वो कुछ कर सके पुलिस चुपचाप खड़े होकर वादी द्वारा कार्यालय के अंदर घुसे हुए लोगो को सामान न फेकने से रोकने की जो मिन्नते कर रही थी उसी का पुलिसकर्मी वीडियो बनाने लगे | वादी ने तुंरत थाने में समय सुबह 10 से 11 बजे लिखित शिकायत दिया की प्रतिवादी घर के अंदर लड़की एवं गुंडे लेकर घुसा हुआ है एवं उनके द्वारा तोड़फोड़ किया जा रहा है थाने में तैनात सिपाही ने भी आश्वाशन दिया की हमारे हाथ में कुछ नही है अधिकारी के आदेश से ही जो होगा सो होगा वादी थाने से वापस कार्यालय पास पहुँच गयी और अपने कार्यालय के सामने खड़ी रही प्रतिवादी को कहती रही सामान इधर उधर न करने व पूरा कागजात कार्यालय के अंदर रखा हुआ है इसी चिंता में वह बार बार पुलिस वालो से मदत मांगती रही क्यूंकि प्रतिवादी कार्यालय अंदर कागजात को भी फाड़कर फेक रहे थे जो की वादी के काम के कागजात थे |करीब दोपहर 12 बजे वादी फिर थाने गयी पुलिस की मदत मांगी पुलिस वालो ने कहा एफआईआर होने पर ही वो कुछ कर पाएगी वादी ने प्रतिवादी उसके रिश्तेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया परन्तु तब भी थाना प्रभारी द्वारा कुछ भी नही किया गया जैसे जैसे शाम होने लगी थाना से कुछ भी मदत नही मिली रात करीब 7.30 से 8 बजे करीब घर अंदर घुसे हुए लड़कियां बाहर निकल रही थी तभी वादी की भी सब्र का बाँध टूट गया और भी घर में प्रवेश करने लगी जिस पर प्रतिवादी ने रोकने के लिए अपने बल का प्रयोग किया जिसपर वादी को उसके दाहिने हाँथ में गम्भीर चोट भी आई वादी जब घर अंदर गयी तो देखती है उसका पूरा कार्यालय का सामान टुटा फूटा कागजात फाड़कर फेका हुआ है प्रतिवादी ने फिर चालाकी किया जैसे ही वादी घर के अंदर हुई उसने बाहर निकल कर दरवाजे पर ताला लगा दिया और बाहर हो गया अब वादी घर के अंदर और प्रतिवादी घर के बाहर हो गया उसी समय सुपेला थाना प्रभारी अपनी टीम लेकर घर पर पंहुचा गुस्से से काफी उत्तेजित थाना प्रभारी वादी के सह कर्मचारियों को पकड़ पकड़ कर पुलिस गाड़ी में बैठाने लगे वादी घर के अन्दर थी उसे निकालने के लिए काफी तेज आवाज का प्रयोग करने लगे वादी ने कहा भी कि प्रतिवादी ने बाहर से ताला बंद कर रखा है,तो थाना प्रभारी महोदय उल्टा चिल्लाकर गाली देकर कहने लगे अपना नाटक तमाशा बंद कर बहुत हुआ तेरी नौटंकी ऐसा दुर्व्यवहारपूर्ण बात करने लगे अपने साथी पुलिसकर्मीयो को घर का ताला तोड़ने का आदेश दिया जैसे ही थाना प्रभारी ने ताला तोड़ने का आदेश दिया पुलिसकर्मी द्वारा घर का ताला तोड़ा गया | अब बात अगर न्यायालय की जाए तो न तो वहां लड़ाई झगड़ा हो रहा था, न ही वहां मारपीट हो रहा था, जबकि वादी ने सुबह शिकायत दर्ज करायी एवं दोपहर में एफ आई आर दर्ज भी करवाई पर रात को थाना प्रभारी आते है और घर का ताला तोड़ते है और वादी एवं उसके कर्मचारियों को गिरफ्तार कर ले जाते है वादी ने कहा भी महोदय रात का समय है एवं आपके द्वारा महिला को थाने ले जाने के लिए न्यायालय का कोई आदेश है क्या पूछे जाने पर थाना प्रभारी ने भड़क कर जवाब दिया की चल थाने चल वही तुझे न्यायलय का आदेश दिखाता हूँ, ऐसा कहकर वादी एवं उसके कर्मचारियों को गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया और घर पर थाना प्रभारी द्वारा ताला लगा दिया गया | बिना न्यायालय के आदेश के थाना प्रभारी ने मेरे कार्यालय पर ताला लगा दिया और आज दिनांक तक कार्यालय में ताला लगा हुआ है | थाने ले जाने के बाद भी साहब को चैन नही था वहां भी सात पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने पर आतुर थे सारी घटनाये थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है कुछ समय बीतने के पश्चात अपने किसी सिपाही से कहकर कोरे कागज पर हस्ताक्षर करने को कहने लगे सभी पत्रकारों ने कागज पर हस्ताक्षर करने पर मना किया तो थाना प्रभारी और भी ज्यादा भड़क उठे और सभी पर धारा 151 लगा कर थाने में बंद कर दिया और वादी एवं साथी महिला कर्मचारियों को महिला थाने भेज दिया गया वहां महिला थाने में रात की ड्यूटी पर तैनात महिला सिपाही ने पूरी रात वादी एवं साथी कर्मचारियों को उनकी औकात दिखाने एवं बताने में व्यस्त थी | साथ ही कहने लगी थाना प्रभारी ने तुम लोगो को जब पेपर में हस्ताक्षर करने को कहा तो तुम लोगो ने मना किया न अब भुगतो ऐसा कहकर जलील करने लगी | पुलिस को आम जनता के संरक्षक के रूप में माना समझा जाता है पर जब पुलिस ही इस तरह की हरकतों पर उतर आये तो आम नागरिक कहाँ जाए और किन पर भरोसा करें | अगले दिन ही सभी पत्रकारों की एसडीएम कार्यालय से जमानत हुई | मिली हवाले की जानकारी अनुसार थाना प्रभारी अपने आपको बड़े आदमी का रिश्तेदार बताता है और जानकारी यह भी है की अपने किसी अधिकारी को कलर प्लस का कपड़ा भी बतौर गिफ्ट दिया करते थे पर थाना प्रभारी किसी को गिफ्ट दे या कुछ भी दे इससे किसी को कुछ भी नही करना है | पर एक बात तो है की कार्यालय को लेकर वादी ने बहुत पहले से ही थाना में साथ ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एवं अनुसूचित जनजातीय आयोग में आवेदन दे रखी हुई जिस पर कार्यवाही कुछ भी हुई जनजातीय आयोग में बयान हो गया है साथ ही थाना में बयान हो चूका था और समस्त दस्तावेज भी जमा करवाए गये थे जिसके बाद भी | थाना प्रभारी बीच बीच में कॉल करके वादी एवं साथियों को डराने की कोशिश करते रहते थे उनके द्वारा थाने बुलाकर कहा जाता था इतनी जल्दी क्या है कही देर न हो जाए इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर भयभीत करने की कोशिश करते थे | थाना प्रभारी के इस तरह के बर्ताव से तंग आकर वादी द्वारा पूर्व में ही दिनांक 22/10/2021 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित आवेदन दिया गया था | थाना प्रभारी अपने आपको बड़े किस राजनीतिज्ञ का भी रिश्तेदार बताता है अभी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी छत्तीसगढ़ को सर्वोच्च स्थान दिलाने में रात दिन मेहनत कर रहे है उनकी सरकार जब से आई है तब से रुकी हुए सारे कामगाज दुरुस्त हुए है | ऐसे में जब थाना प्रभारी किसी बड़े अधिकारी का रौब दिखाते है तो यह तो गलत है क्यूंकि छत्तीसगढ़ में एक ही बड़े अधिकारी एवं राजिनीतिकार हमारे सीएम महोदय ही है| जिन्होंने गाँव से लेकर शहर तक नागरिकों को सुख सविधाएं प्रदान करवाने के लिए भरसक प्रयास में है | जानकारी यह कहती है की किसी के घर का मामला हो तो इसका निराकरण संबंधित न्यायलय ही न्याय करती है परन्तु थाना प्रभारी ही न्यायधीश बनकर कागजी फरमान सुनाने में लगे है | सीएम के गृह क्षेत्र में सुपेला थाना प्रभारी अपने पद का दुरूपयोग कर रहा है हमारे सीएम भूपेश बघेल,गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू,विधायक देवेन्द्र यादव के क्षेत्र में दुर्ग विधायक अरुण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल ,भिलाई महापौर नीरज पाल के गृह क्षेत्र में, 32 बंगला पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक के क्षेत्र में कांग्रेस के गृह क्षेत्र कहे जाने वाले भिलाईनगर जहाँ कांग्रेस के सभी सरकारे रहने के बाद भी महिलाओ के साथ ऐसा कृत्य थाना प्रभारी द्वारा किया गया | थाना प्रभारी को न किसी का डर न किसी का भय है महिलाओ के साथ दुर्व्यवहार एवं बत्तमीजी जबरदस्ती 151 का केस बनवाकर उनके घर से बेदखल करवाया गया खुद थाना प्रभारी द्वारा खुद ताला तोड़ा गया क्या थाना प्रभारी को शासन प्रशासन का भय डर नही है अपने उच्च अधिकारीयों की भी डर भय नही थी जो की दुर्ग भिलाई में कांग्रेस का गढ़ है उसके बाद भी एक आदिवासी महिला को रातभर थाने में बैठाया गया साथ ही रात भर महिला सिपाही द्वारा परेशान करने का भी आदेश दिया गया था | जोकि मिली सूत्रों से जानकारी के अनुसार थाना का कैमरा चालू स्थिति में है लेकिन थाना में आर टी आई में सूचना मागने पर कैमरा ख़राब की जानकरी दी गई लेकिन हमारे डीजीपी महोदय का लिखित में कथन है की प्रत्येक थानों के कैमरे सही एवं चालू स्थिति में रहना अनिवार्य है | जोकि थाने में महिलाओ के साथ बत्तमीजी किया गया यह सच्चाई सामने आ जाएगी इसलिए थाना प्रभारी द्वारा कैमरा ख़राब का बहाना दिया गया ऐसे थाना प्रभारी के कारण से थाना सुरक्षित नही है क्या थाना प्रभारी न्यायधीश से बड़ा हो गया है किसी के घर का ताला तोडना घर में ताला लगाने का थाना प्रभारी का स्वयं का अधिकार हो गया है |
जोकि आगे हम इसी थाना प्रभारी के बारे में आपको बतायेंगे की इस थाना प्रभारी द्वारा पूर्व थाने में सरकारी कागजो के साथ कैसा खेल खेला गया है जिसमे सीधा सीधा थाना प्रभारी द्वारा 420,67,68,120 बी एवं अन्य धराये का आरोपी है एवं और भी बहुत से सरकारी कागजो से खेला हुआ दस्तावेज हमारे पास साक्ष्य के रूप में मौजूद है थाना प्रभारी द्वारा अवैध राज फोटो एवं नाम सहित आपके सामने लाने वाले है | त्वरित ख़बरें परिवार के किसी भी कर्मचारी एवं डायरेक्टर के ऊपर आरोप लगाया जाता है उसकी सम्पूर्ण जवाबदारी थाना प्रभारी की होगी क्यूंकि जब 151 जैसे झूठा केस बनाकर थाने में बैठाया जा सकता है तो उनके द्वारा झूठा कोई भी आरोप लगाया जा सकता है |
आगे समाचार जानने के लिए पढ़ते रहिये त्वरित ख़बरें अखबार

Facebook Conversations