प्लास्टिक प्रदूषण- खतरे मे पर्यावरण
त्वरित ख़बरें - दीपमाला शेट्टी रिपोर्टिंग

 पर्यावरण अर्थात हमारे चारों ओर का क्षेत्र जिसमें सजीव निर्जीव जैविक अजैविक सभी कुछ सम्मिलित है और इस पर्यावरण का मनुष्य भी एक अभिन्न हिस्सा है किंतु आज मनुष्य जाति ही इस पर्यावरण के लिए खतरा बन चुका है । आज हम इस पर्यावरण में खुद ही प्लास्टिक नाम का जहर घोल रहे हैं। ·

           विश्व पर्यावरण दिवस 2025 का मुख्य कथन है प्लास्टिक प्रदूषण को दूर करना । प्लास्टिक प्रदूषण आज इस पर्यावरण को तीन स्तरों पर घातक प्रभावों को बढ़ा देते हैं पहला स्तर जलवायु परिवर्तन का होना, द्वितीय स्तर जैव विविधता को नुकसान पहुंचाना, तृतीय स्तर जिसमें पर्यावरण में प्रदूषण और कचरा फैला हुआ पाया जाना।

           आज भी मुझे राजनांदगांव के शिवनाथ नदी में बाढ़ के बाद का दृश्य नजर आता है जिसमें नदी के चारों ओर प्लास्टिक फैला हुआ था, जैसे प्रकृति मनुष्य को तोहफे में उनका ही नदी में डाला हुआ कचरा वापस लौट रही है कहते हैं ना जो नदी मैया को देंगे हमें हमें वापस वही प्राप्त होगा ।

 प्लास्टिक प्रदूषण के प्रमुख कारण:-

1. भारत में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का बहुत अधिक प्रयोग करना ।

2. नदियों और महासागरों में प्लास्टिक कचरो का भंडार बढ़ते जाना ।

3. शहरीकरण शहरों में गांव की तुलना में प्लास्टिक का अधिक से अधिक प्रयोग होना ।

4. शादी पार्टी अन्य गतिविधियों में डिस्पोजेबल प्लास्टिक प्लेट एवं ग्लास का प्रयोग करना ।

 प्लास्टिक से जैव विविधता को खतरा :-

1. प्लास्टिक BPA बिसफिनाल A जैसे विषैला रसायन उत्सर्जित करता है

2. प्लास्टिक को जलाने पर हेवी मेटल निकलते हैं जो कृषि भूमि को प्रदूषित करते हैं ।

3. नदियों में मौजूद माइक्रो प्लास्टिक जलीय जीवों को एवं आवारा पशु और समुद्री जीवों जब प्लास्टिक को गलती से भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं तो उनके आंतों में रुकावट आती है जिससे बेजुबान जानवरों की मृत्यु हो सकती है

 प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के उपाय:-

1. सिंगल यूज़ प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें ।

2. बाजार जाते समय घर से ही कपड़े या जुट का बैग साथ लेकर जाएं की प्लास्टिक का प्रयोग न करना पड़े ।

3. प्लास्टिक प्लेट की जगह परंपरागत तरीके से बने पत्तों के प्लेट एवं मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करें जिससे लोकल व्यवसाय को बढ़ावा मिले और प्रकृति भी सुरक्षित रहे ।

4. हर व्यक्ति प्रयास करें कि” एक पेड़ मां के नाम” अभियान का अभिन्न हिस्सा बने।

5. प्रयास करना कि अधिक से अधिक प्लास्टिक का रीसायकल हो सके और पुनः चक्रीकरण योग्य प्लास्टिक को अलग से संग्रहित करना।

 अंत में हम सभी ये प्रण ले की कम से कम प्लास्टिक का प्रयोग करेंगे और एक पेड़ मां के नाम अवश्य लगाएंगे जिससे कि पर्यावरण सुरक्षित रहे क्योंकि पर्यावरण है तो हम हैं।

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