नक्सली खत्म, फिर भी इंतजार जारी: 100 जवानों की सुरक्षा में 42 करोड़ का अधूरा पुल
त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के सरकारी दावों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बावजूद पुल निर्माण का काम वर्षों से अधूरा पड़ा है। करीब 42 करोड़ रुपये की लागत वाला यह पुल पिछले छह साल से निर्माणाधीन है, लेकिन अब तक इसके केवल आठ पिलर ही तैयार हो सके हैं।

जानकारी के अनुसार, पुल निर्माण की शुरुआत करीब छह वर्ष पहले हुई थी। शुरुआती अनुमान के मुताबिक परियोजना की लागत लगभग 14 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन निर्माण में लगातार देरी और बढ़ती लागत के कारण अब यह राशि बढ़कर 42 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी परियोजना की लागत में करीब 28 करोड़ रुपये का इजाफा हो चुका है।

पुल निर्माण स्थल की सुरक्षा के लिए करीब 100 जवानों की तैनाती की गई है। क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां पहले की तुलना में काफी कम होने के बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अभाव में उन्हें आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब नदी-नालों में पानी बढ़ने से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना में देरी के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाएं, तकनीकी चुनौतियां और ठेका एजेंसियों की सुस्ती जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, संबंधित विभाग का कहना है कि निर्माण कार्य में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही इसे पूरा करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

अब सवाल यह है कि जब क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पर्याप्त जवान तैनात हैं और नक्सली गतिविधियां भी कम हो चुकी हैं, तब भी आखिर यह पुल कब तक पूरा होगा और स्थानीय लोगों का इंतजार कब खत्म होगा।

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