पराक्रम दिवस पर साहित्यिक आयोजन कर मनाई गई नेता जी सुभाष जयंती
राजनांदगांव / प्रखर राष्ट्रभक्त नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जयंती अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य समिति द्वारा साहित्यिक आयोजन कर ओज पूर्ण काव्य पाठ के बीच पराक्रम दिवस मनाया गया।
साहित्य समिति के संरक्षक शारदा तिवारी व अशोक चौधरी की उपस्थिति में मिथिला धाम गणेश मंदिर में आयोजित साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता कमला कालेज के प्रोफेसर व चिंतक के, के द्विवेदी ने की। इस दौरान नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को श्रद्धा पूर्वक नमन करते हुए किसान नेता व चिंतक अशोक चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेंजों से लड़ाई लड़ते समय यदि नेता जी को उस समय के कांग्रेसियों का साथ मिलता तो हमारा देश भारत द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही स्वतंत्र हो गया होता। लेकिन दुर्भाग्य कि ऐसा हो न सका।
नेता जी कहलाने का हक
छ०ग० राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा "अमात्य" ने काव्यात्मक शैली में नेता जी को नमन करते हुए कहा -देश के लिए की लड़ाई अथक,,यह श्रेय नेता जी को है /
नेताजी कहलाने का हक,, सिर्फ नेता जी को है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कमला कालेज के प्रोफेसर द्विवेदी ने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को प्रखर राष्ट्रभक्त बताते हुए कहा कि नेता जी इटली, फ्रांस, जर्मनी ,जापान आदि अंग्रेजो के दुश्मन देश के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ आजाद हिन्द फौज का गठन कर युद्ध छेड़ दिया था और बर्मा तक पहुंच कर सबसे पहले मणीपुर में तिरंगा फहराया था। उन्होंने अपने ही लोगों से लड़ने से इंकार कर दिया था।
संरक्षक मती शारदा तिवारी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर उन्हें याद नहीं किए जाने पर कहा कि उन्हें ब्रह्मांड देख रहा है। साहित्य समिति ने उन्हें याद किया,,,नेताजी सदैव अमर रहेंगे।
जोशीले व्यक्तित्व थे नेताजी
साहित्य समिति के उपाध्यक्ष गिरीश ठक्कर "स्वर्गीय" ने नेताजी का नाम सुनते ही एक जोशीला व्यक्तित्व सामने आने की बात कहते हुए उन्होंने -तुम मुझे खून दो ,,मैं तुम्हें आजादी दूंगा वाले विश्व गूंजित नारे को याद किया।
ओज पूर्ण कविता के धनी विरेंद्र तिवारी "वीरु" ने इन शब्दों में नेता जी को नमन किया - जंगे आजादी में सबसे खास थे / उनकी एक ही ललकार में सब पास- पास थे / गर खून के बूंद सबने दिए होते,,,तो बरसों की आजादी का प्रणेता नेता जी सुभाष थे,,।।
साहित्य समिति के काव्यायोजन में ओज की बानगी को बनाए रखते हुए कवि शैलेन्द्र गुप्ता ने कहा -ऐ वीर शहीदों करते हैं तुम्हें नमन / बलिदान तुम्हारे व्यर्थ नहीं जाएंगे,, याद रखेगा वतन,,।।
साहित्य समिति के सचिव,
कलाकार-कवि मान सिंह "मौलिक" ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर सार गर्भित उद्बोधन देते हुए कहा कि -आजाद हिन्द सेना से लड़ने ,देश की सेना को भेजना चाहते थे / कैसे थे ये हमारे कर्णधार जो नेता जी को मारना चाहते थे /,, कर दिया नेता जी ने अपने ही देश की सेना से लड़ने से इंकार,,/ नेता जी तेरी जय हो , तेरी सदैव होती रहेगी जै- जै कार ।।
ग्राम्य कवि पवन यादव पहुना ने
नेता सुभाष चन्द्र बोस को वीर शिवाजी की तरह बताते हुए कहा कि जिस तरह मुगलों के चंगुल से छिप कर निकले शिवाजी ने गुरिल्ला युद्ध कर मुगलो के नाक में दम कर दिया था। उसी तरह अंग्रेज को चकमा देते हुए उनके चंगुल से मुक्त हो कर नेता जी ने भारत की आजादी के लिए आजाद हिन्द फौज बना कर अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया था। इसी तरह एक और ग्राम्य कवि आनंद राम सार्वा ने छत्तीसगढ़ में यों कहा - वीर भगत सिंह, चंद्रशेखर संग बिस्मिल राम प्रसाद के जरुरत हे,/ आज हमर देश ल,, नेता जी सुभाष के जरुरत हे,।। कार्यक्रम का विभिन्न क्षणिकाओं के बीच बौद्धिक एवं उर्जस्व संचालन वरिष्ठ कवि/ साहित्यकार कोशा ने किया वहीं उपस्थितों का आभार प्रदर्शन मेजबान संरक्षक चौधरी जी ने किया। उक्ताशय की जानकारी मानसिंह मौलिक ने दी।

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