भिलाई नगर,4 मार्च 2022:- हमारे विचार व्यक्ति, परिस्थिति, प्रकृति के कारण उत्पन्न होते है। कई बार विचारों का प्रवाह इतना वेग होता है, की हम चाहकर भी उन्हें रोक नही पाते। विचारों पर ब्रेक नही लगा पाते। हमें विचारों की उपत्ति ,उद्गम के स्त्रोत पर कार्य करना है। सभी जानते है कि हमारा मन अशांत होने की स्तिथि में इन विचारों को कंट्रोल नही कर पाता। उक्त बातें वैशाली नगर लोकांगन परिसर में चल रहे "मन की शांति जीवन की शक्ति" 10 दिवसीय शिविर के प्रथम दिन ब्रह्माकुमारी रिया दीदी ने कही। आपने बताया कि कमजोर,व्यर्थ, निगेटिव व अनावश्यक विचारों से हम जीती बाज़ी भी हार जाते है जीवन की इसलिए इन्हें पहचान कर मन को शक्तिशाली बनाकर जीवन मे आगे बढ़ना है।
विज्ञान एवं मनो विज्ञान मानता है जैसा सोचेंगे वैसा बन जाएंगे। संकल्पो विचारों का स्वरूप हमारा जीवन होता है। इसलिए हमारे मन में सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव विचार को आने दो। बाकी के विचारों के स्त्रोत, उद्गम को नो एंट्री। न सुनो न दुसरो को सुनाओ व्यर्थ व निगेटिव बाते। जिसे आपने आफिस के उदहारण से स्पष्ट करते हुए बताया कि बॉस अपने अधीनस्थ तीन कर्मचारियों को डांटता है तो तीनों की प्रतिक्रिया अलग अलग होती है , एक डांट खाने के बाद नॉर्मल रहता है, दूसरा कहता है सीखने को मिला अगली बार और अच्छा करूँगा, तीसरा डिप्रेशन में जॉब छोड़ने का विचार करता है। सभी को होमवर्क में एक स्लीप में दिन भर के श्रेष्ठ विचार लिखकर उसे दोहराकर दिनचर्या का अंग बनाना है।

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