अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का पिछले हफ्ते भारत को लेकर दिया गया जेनोफोबिक वाला बयान सुर्खियों में है. जो बाइडन ने कहा था कि चीन, जापान और भारत को जेनोफोबिया (विदेशियों को नापसंद करना) रोक रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए प्रवासन अच्छा रहा है. उन्होंने कहा, “हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ने का बड़ा कारण आप और अन्य लोग हैं. क्यों? क्योंकि हम प्रवासियों का स्वागत करते हैं. चीन आर्थिक रूप से क्यों तबाह हो रहा है? क्यों जापान परेशान है? रूस और भारत के साथ क्या समस्याएं हैं? क्योंकि वे जेनोफोबिक हैं. वे प्रवासियों को नहीं चाहते हैं. प्रवासी ही हमें मजबूत करते हैं.”
दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के लिए माइग्रेशन एक बड़ा मुद्दा बन गया है. बाइडन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रवासी विरोधी बयानबाजी की भी निंदा की है. बाइडन का कहना है कि प्रवासी परेशानी का सबब नहीं, हमारी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं.
क्या है जेनोफोबिया
जेनोफोबिक उनको कहा जाता है, जो बाहरी लोगों से नफरत करते हैं. यानी जो बाइडन की नजर में भारत एक ऐसा देश है जो दूसरे देशों के लोगों से नफरत करता है. कैंब्रिज डिक्शनरी के अनुसार जेनोफोबिया का अर्थ विदेशियों, उनके रीति-रिवाजों, उनके धर्म आदि को नापसंद करना या उनसे डरना है. मरियम-वेबस्टर के अनुसार जेनोफोबिया का मतलब अजनबियों या विदेशियों या किसी भी अजीब या विदेशी चीज से डर और नफरत है. दूसरे शब्दों में कहें तो विदेशी लोगों को नापसंद करना जेनोफोबिया कहलाता है.
क्या चुनाव की वजह से दे रहे बयान
जो बाइडन के जेनोफोबिक वाले बयान को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि क्या वो ऐसी बातें इसलिए कह रहे हैं कि अमेरिका में इस साल नवंबर में राष्ट्रपति का चुनाव है. जो बाइडन ने अप्रवासियों का मुद्दा उठाते हुए कहा, “हमारी अर्थव्यवस्था के बढ़ने का एक मुख्य कारण आप लोग हैं. हम बाहरी लोगों का स्वागत करते हैं, लेकिन कई देश ऐसे लोगों को बोझ समझते हैं. चीन आर्थिक रूप से इतनी बुरी तरह क्यों रुक रहा है, जापान को परेशानी क्यों हो रही है, रूस को क्यों दिक्कत है, भारत क्यों नहीं बढ़ रहा है, क्योंकि वे जेनोफोबिक हैं. वे अप्रवासियों को नहीं चाहते, लेकिन सच ये है कि आप्रवासी ही हमें मजबूत बनाते हैं.”
आईएमएफ ने क्या लगाया अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बीते महीने अनुमान लगाया था कि साल 2024 में प्रत्येक देशों की वृद्धि बीते साल की तुलना में धीमी हो जाएगी, जो विकसित देश जापान में 0.9 फीसदी से लेकर विकासशील भारत में 6.8 फीसदी तक होगी. आईएमएफ का अनुमान है कि अमेरिका की वृद्धि दर 2.7 फीसदी रहेगी, जो पिछले साल की 2.5 फीसदी से थोड़ी ज्यादा है. कई अर्थशास्त्री उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन का श्रेय आंशिक तौर पर देश की श्रम शक्ति को बढ़ाने वाले प्रवासियों को देते हैं.

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