कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने मरोदा से दल्ली-राजहरा तक ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजन को दौड़ाने की मंजूरी दे दी है। पिछले दिनों कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने ट्रैक का निरीक्षण किया था। उनका ओके रिपोर्ट सोमवार को डीआरएम दफ्तर को मिल गया है। अब इस ट्रैक पर कभी-कभी इलेक्ट्रिकल इंजन दौड़ सकेगा। इस ट्रैक पर इन दिनों डीजल इंजन दौड़ रहा है। इलेक्ट्रिकल इंजन के दौड़ने से प्रदूषण से राहत मिलेगी। गुड्स ट्रेनों को चलाने में सुविधा होगी। मेमू ट्रेन के अलावा अन्य पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन भी शुरू किया जा सकेगा।
दल्ली में पैनल इंटर लॉकिंग रूम का निरीक्षण
सीआरएस की टीम ने दल्ली-राजहरा रेलवे स्टेशन में बने पैनल इंटरलॉकिंग रूम की ऊपरी मंजिल का निरीक्षण किया था। यहां उनकी टीम करीब दो घंटे रुकी थी। इसका निरीक्षण केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारी सुवोमय मित्रा के नेतृत्व में किया गया। इससे पूर्व कुसुमकसा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर बने एसएसपी ट्रैक प्वाइंट सब स्टेशन का उन्होंने उद्घाटन किया। निरीक्षण के दौरान अंडर व ओवरब्रिज के अलावा हाइटेंशन बिजली के तारों की बारीकी से जांच की।
प्रदूषण होगा कम, बचेगा समय, सफर होगा आसान
इलेट्रिकल इंजन के दौड़ने से पहला लाभ प्रदूषण को बढ़ने से रोकने में मिलेगा। डीजल के स्थान पर बिजली का उपयोग किया जाएगा। दूसरे पैसेंजर और गुड्स ट्रेनों की गति में वृद्धि होगी। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि गुड्स ट्रांसपोर्ट में भी वृद्धि होगी। आयरन ओर लाने के साथ ही वनोपज का भी परिवहन किया जा सकेगा। स्टेशनों के आसपास रहने वालों के पास रोजगार के एक से अधिक विकल्प भी बड़ सकते हैं। रेलवे को भी डीजल की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।

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