एक बेजान मैच के आखिरी 15 मिनट में कुछ ऐसा हुआ कि देखने वाले अपनी कुर्सियों से उछल पड़े। एक पल में पूरी कहानी बदल गई। जहां खुशियों की लहर थी, वहां मातम पसर गया था। जिनकी नसों में खून धीमा बहने लगा था, बीपी लो होता रहा था, अचानक से वो अपनी बाजुएं फड़काने लगे। ऋषभ पंत का मुंह बन गया। लंबी-लंबी सांसें खींचने लगे। दिल्ली के पृथ्वी शॉ अपनी जगह पर चित गिर पड़े, जैसे चलने की ताकत न बची हो।
ये सब कुछ शुरू हुआ दूसरी इनिंग के 17वें ओवर की चौथी गेंद से। इससे पहले तक लोग टीवी के सामने बैठकर जम्हाई ले रहे थे और क्वालिफायर 2 खेल रहीं दोनों टीमों दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइटराइडर्स को कोस रहे थे। बेकार, एक तरफा मैच था। फिर अचानक बाजी ऐसे पलटी कि आंखों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया।
आइए इस कहानी में तस्वीरों के साथ उतरते जाते हैं-

दिल्ली ने पहले खेलकर 135 रन बनाए थे। इस आसान से टारगेट का पीछा करने उतरी कोलकाता का पहला विकेट 13वें ओवर में 96 रन पर गिरा। सिर्फ 39 बनाने और बाकी थे और वह भी 46 गेदों में, हाथ में 9 विकेट और क्रीच पर जमे जामाए बल्लेबाज शुभमन गिल खेल रहे थे। किसी T-20 में इससे बोरिंग मैच क्या होगा।

इसीलिए जब 16वें ओवर की आखिरी गेंद पर कोलकाता के नीतीश राणा आउट हुए तो दिल्ली के कप्तान ऋषभ पंत के चेहरे पर एक पैसे की खुशी नजर नहीं आई।

इसी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए जब 17वें ओवर की चौथी गेंद पर शुभमन गिल के बल्ले को चूमती हुई गेंद ऋषभ पंत के दस्तानों में पहुंची, तो उन्होंने बड़े बेमन से कैच को पकड़ा। कैच पकड़कर रत्तीभर खुश नहीं हुए। चुपचाप गेंदबाज को बॉल वापस कर दी। तब 125 रन बन गए थे। 11 रन बाकी थे और गेंदे बची थीं 20। खुद ऋषभ को भरोसा नहीं था कि यहां से बाजी पलट सकती है।

गिल के आउट होने के बाद 17वें ओवर में कोई रन नहीं बना। 18वां ओवर आया। पूरे ओवर में सिर्फ 1 रन बना और आखिरी गेंद पर दिनेश कार्तिक बोल्ड हो गए।

19वें ओवर में 4 रन बने। आखिरी गेंद पर कोलकाता के कप्तान ओएन मोर्गन आउट हो गए। मोर्गन को आउट होता देख दिल्ली टीम के मालिकों में एक युवा शख्स अपनी जगह पर चीखकर रोने लगे। उनके ये आंसू जज्बात से भरे थे। उस भाव से भरे थे कि नहीं। अभी सब खत्म नहीं हुआ है।

ऋषभ पंत का खोया हुआ विश्वास जाग गया था। दिल्ली के फैन्स को जीत एकदम आंखों के सामने नजर आने लगी थी। वे जोर-जोर से चिल्लाने लगे थे। अचानक कोलकाता के फैन्स पत्थर की तरह हो गए। मानो काटो तो खून नहीं। वे बिना पलकें झपकाए बस देख रहे थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है। तस्वीर में दिल्ली के फैन्स हैं।

अब शुरू हुआ 20वां ओवर। पहली गेंद पर राहुल त्रिपाठी ने सिंगल लेकर पाला बदल लिया। अब कोलकाता को 5 गेंदों पर 6 रनों की दरकार थी। बल्ला शाकिब के हाथ में था। शाकिब को अर्से से किसी ने शानदार बैटिंग करते नहीं देखा था। हुआ भी वही जिसका डर था।

दूसरी गेंद - शाकिब अल हसन कोई रन नहीं बना सके। अब कोलकाता को 4 गेंदों पर 6 रनों की दरकार थी। तीसरी गेंद शाकिब के पैड पर लगी। ऋषभ इतनी तेज चिल्लाए, जैसे पूरे मैच की एनर्जी इसी खास पल के लिए बचा के रखी थी। अंपायर ने उंगली उठा दी। अब कोलकाता को 3 गेंदों पर 6 रनों की दरकार थी। दिल्ली के फैन्स मान बैठे कि मैच उनकी झोली में आ चुका था।

लेकिन कोलकाता के फैन मन ही मन थोड़े से खुश भी हो रहे थे कि अब सुनील नरेन आएंगे। वो छक्के लगा सकते हैं। नरेन ने किया भी वही। आते ही बल्ला भांजा। गेंद हवा में झूल गई। कैमरामैन ने नीचे नहीं दिखाया। लगा कि छक्का चली गई, लेकिन महज 5 से 10 सेकेंड के भीतर जब गेंद नीचे आने लगी तो दिखा कि वहां पर अक्षर पटेल खड़े हैं। उन्होंने कैच पकड़ लिया और कोलकाता के फैन्स की रही-सही उम्मीद खत्म हो गई।

अश्विन ओवर की पांचवी गेंद की तैयारी कर रहे थे। ऐसे कई मौकों पर उन्होंने अपनी टीम को जीत दिलाई है। अश्विन अपनी चतुराई के लिए पहचाने जाते हैं। उनके सामने 10 गेंद पर 6 बनाकर कर खेल रहे राहुल त्रिपाठी थे। अश्विन ने गेंद ऑफ स्टंप से थोड़ी दूर और छोटी रखी थी। उन्हें लगा था कि टप्पा गेंद राहुल ज्यादा से ज्यादा एक या दो रन की तरह से मारेंगे, लेकिन राहुल ने थोड़ा सा झुक कर आड़े बल्ले से लॉन्ग ऑफ के ऊपर से करारा छक्का जड़ दिया।

राहुल के छक्के के बाद हरभजन ने उन्हें गोद में उठा लिया। एक पल में पूरी कहानी बदल चुकी थी। जहां खुशियों की लहर थी, वहां मातम पसर गया था। जिनकी नसों में खून धीमा बहने लगा था, बीपी लो होता रहा था, अचानक से वो अपनी बाजुएं भड़काने लगे। ऋषभ पंत का मुंह बन गया। लंबी-लंबी सांसे खींचने लगे। दिल्ली के पृथ्वी शॉ अपनी जगह पर धरती पर सो गए, जैसे चलने की ताकत न बची हो। ऋषभ पंत ने किसी तरह हाथ देकर उन्हें उठाया। जब ऋषभ जवाब देने के लिए आए तो एक लंबी सांस लेकर बोले- मेरे पास मेरी फीलिंग्स को बयान करने के लिए फिलहाल लफ्ज नहीं हैं।

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