नीमच की झुग्गियों में रहने वाली 5 बेटियां मुंबई में अपने टैलेंट से सबको झूमने पर मजबूर कर रही हैं। रियलिटी शो डांस दीवाने जूनियर्स में इनका सिलेक्शन हुआ है। बच्चियां नीमच शहर की एकता कॉलोनी से लगी झुग्गी बस्ती में रहती हैं। कई बार इन्हें एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता था, लेकिन इनका हुनर इन्हें मुंबई ले गया।
एक्ट्रेस नोरा फतेही और नीतू सिंह ने भी इनकी जमकर तारीफ की। कोरियोग्राफर मर्जी पेस्तोनजी ने यहां तक कह दिया कि इस मंच से तुम्हारी शुरुआत है, अब तुम्हारे हर सपने पूरे होंगे। देश सहित दुनियाभर में उनके डांस के लोग दीवाने हो गए हैं।
झुग्गी में रहने वाली सोफिया अब्बासी, रमिला भूरिया, आशा मईडा, अंजलि सारेल और सपना निनामा की उम्र 11 से 14 साल के बीच है। सभी बच्चियां पास के ही सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। सोफिया अब्बासी 11वीं, रमिला भूरिया 8वीं, आशा मईडा 8वीं, अंजलि सारेल 7वीं और सपना निनामा तीसरी कक्षा में हैं। इनकी मांएं लोगों के घरों में बर्तन मांजती हैं। पिता हाथ ठेला धकाने या मंडी में हम्माली का काम करते हैं। इनमें से एक बच्ची के सिर से पिता का साया उठ चुका है।

पांचों बच्चियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। कई बार इन्हें एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता था। इनका हुनर इन्हें मुंबई ले गया है।
बिखरे पड़े अनाज को समेटकर बनाती हैं खाना
बेटियों ने डांस शो में बताया कि कई बार एक वक्त का खाना ही नसीब होता है। कई बार कृषि मंडी में रात को जाकर दिनभर में बिखरे अनाज को समेटती हैं और घर लाती हैं। तब जाकर खाना पकता है। उदय सारेल इनके डांस ट्रेनर भी हैं। उदय डांस के रियलिटी शो में पहले हिस्सा ले चुके हैं। उदय कहते हैं कि बस्ती में ज्यादातर लोगों के पास गरीबी रेखा से नीचे का कार्ड भी नहीं है। इस कारण सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता।

डांस दीवाने में मंच पर मौजूद सोफिया अब्बासी, रमिला भूरिया, आशा मईडा, अंजलि सारेल और सपना निनामा। इनकी उम्र 11 से 14 साल के बीच है।
स्पीकर नहीं है, इसलिए मोबाइल फोन से प्रैक्टिस
शो के दौरान नोरा फतेही ने पूछा कि आपका सिंक (तालमेल) बहुत अच्छा है, कैसे? तो उन्होंने बताया कि हमारे पास स्पीकर नहीं है, इसलिए हम मोबाइल फोन से प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने डांस करके दिखाया तो अभिनेत्री नीतू सिंह की आंखें नम हो गईं। डांस के बाद नोरा फतेही ने पांचों बच्चियों को गले से लगा लिया।

इन बच्चियों की मांएं दूसरों के घरों में बर्तन मांजती हैं। पिता हाथ ठेला धकाने या मंडी में हम्माली का काम करते हैं। इनमें से एक बच्ची के सिर से पिता का साया उठ चुका है।

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